दो साल तक छकाता रहा था आरोपी
20 अक्तूबर 2020 को जोनल एसआईटी गठित कर क्रशर प्लांट कारोबारी की मौत के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना सौंपी गई थी। दो सदस्यीय जोनल एसआईटी में प्रयागराज में तैनात रहे तत्कालीन एसपी क्राइम आशुतोष मिश्र को मुख्य विवेचक बनाया गया था। उनके तबादले के बाद वर्तमान एसपी क्राइम सतीश चंद ने विवेचना शुरू की थी। एसआईटी ने कुर्की की कार्रवाई भी की लेकिन पाटीदार का कुछ पता नहीं चला था। लगभग दो साल तक धूल फांकने के बाद भी पाटीदार हाथ नहीं आए, जिसके बाद उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी। अब कोर्ट की अनुमति से मामले की अग्रिम विवेचना की जा रही है।
परिजनों ने रेंज एसआईटी पर उठाए थे सवाल
विवेचना जोनल एसआईटी को सौंपने का निर्णय रेंज एसआईटी पर मृतक कारोबारी के परिजनों की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद लिया गया था। गौरतलब है कि पहले विवेचना रेंज स्तर पर गठित एसआईटी कर रही थी। इसी दौरान मृतक कारोबारी के भाई और मुकदमा वादी रविकांत त्रिपाठी ने पत्र जारी कर विवेचना में जुटी रेंज एसआईटी की मंशा पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि एसआईटी की मंशा आरोपियों को गिरफ्तार करने की नहीं है। जिससे पूरा परिवार बेहद निराश व डरा हुआ है। परिवार ने आईजी चित्रकूट रेंज से यह भी अनुरोध किया कि विवेचना अन्यत्र से कराई जाए। मामला संज्ञान में आने के बाद उच्चाधिकारियों ने परिजनों से बात की। साथ ही उनकी सहमति पर विवेचना जोनल स्तर पर एसआईटी गठित की गई थी।