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पूर्व विधायक और प्रमुख के कत्ल की साजिश नाकाम

Wed, 22 Jun 2016 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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क्राइम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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एसटीएफ इलाहाबाद ने फतेहपुर से फरार 15 हजार रुपये के इनामी खूंखार डाकू सरगना सीताराम समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर पूर्व भाजपा विधायक और ब्लाक प्रमुख की हत्या की साजिश नाकाम कर दी। एसटीएफ ने मंगलवार दोपहर इन अपराधियों को नैनी इलाके में उस वक्त पकड़ा जब वे दो बाइक पर जेल की तरफ जा रहे थे। उनके पास चार तमंचे, ढेरों कारतूस, कई मोबाइल फोन, फर्जी वोटर आईडी, नगदी मिली है।
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एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के उपनिरीक्षक अतुल कुमार सिंह और हेडकांस्टेबल फरार अपराधियों की तलाश में जुटे थे तभी उन्हें मंगलवार सुबह खबर मिली कि फतेहपुर जनपद का कुख्यात डाकू सरगना 15 हजार रुपये का इनामी सीताराम मौर्या अपने साथियों संग नैनी पुल से होकर अरैल की तरफ जाने वाला है। एसटीएफ टीम ने अरैल मोड़ की तरफ जाने वाली पुलिया पर घेराबंदी कर कुछ देर बाद दो बाइक पर उधर आए चार लोगों को हिरासत में ले लिया।

तलाशी में उन चार लोगों के कब्जे से चार तमंचे, बीस कारतूस, पांच मोबाइल फोन, एक फर्जी वोटर आईकार्ड, 67 सौ रुपये मिले। पकड़े गए अपराधियों में फरार डाकू सरगना सीताराम मौर्या, उसका भांजा फतेहपुर में सुल्तानपुर घोष इलाके के इरादतपुर गांव निवासी संतोष कुमार मौर्या, उसका साढ़ू खागा में ईंटगांव निवासी धनमान और साथी बांदा में बबेरू के अनवान गांव निवासी कालीचरन मौर्या उर्फ शास्त्री है। सीताराम ने बताया कि वह 1994 में खागा इलाके में पुलिस मुठभेड़ के बाद फरार होकर परिवार सहित छत्तीसगढ़ जाकर टिक गया। वहां खिलौने की दुकान लगाता और बीच-बीच में फतेहपुर आकर संगीन वारदात अंजाम देकर फिर भाग जाता। वहां उसने अपना नाम अशोक रखा था। वह फरारी के दौरान लगातार खागा फतेहपुर के पूर्व भाजपा विधायक धुन्नी सिंह और उनके भतीजे ब्लाक प्रमुख अशोक सिंह हत्या की योजना बनाता रहा। 
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 उसका बड़ा भाई राधेश्याम भी फरार होकर उसके साथ ही रहने लगा था। बाद में वे दोनों मध्य प्रदेश में शहडोल के निकट जयसिंह नगर में सुसखाह में आकर रहने लगे। इसी बीच पुलिस ने उसके भाई राधेश्याम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वह बबेरू बांदा में अपने साथी कालीचरन के पास आकर पूर्व भाजपा विधायक और उनके ब्लाक प्रमुख भतीजे की हत्या की साजिश रचने लगा। अपने साढ़ू और भांजे को भी वारदात में शामिल किया।

इलाहाबाद में वकील से भी मिलकर कत्ल के बाद सरेंडर की योजना बना ली। असलहों की भी व्यवस्था कर ली थी लेकिन उसे कुछ बड़े हथियार की दरकार थी। उसने फतेहपुर में उस शख्स से संपर्क कर लिया था जिसके पास वह दो बंदूक छोड़ गया था। अगले एक-दो रोज में वह दोनों कत्ल अंजाम देने की तैयारी में था। ब्लाक प्रमुख अशोक सफारी में एक गनर के साथ चलता है इसलिए उसे निशाना बनाना आसान समझा गया। उसका भतीजा दीपक नैनी जेल में बंद पिता राधेश्याम से मिलने आ रहा था। उससे मुलाकात के लिए ही वह भी अरैल की तरफ आया था। 

डाकू सरगना सीताराम ने एसटीएफ को बताया कि शहडोल के निकट जयसिंह नगर में आकर उसने बीपीएल कार्ड और पहचान पत्र बनवा लिया था। साथ ही सरकारी अनुदान की जमीन हासिलकर खेती भी करने लगा था। उसने अपना नाम विजय कुशवाहा और पत्नी का नाम रामरती रखा था। स्थानीय लोगों को भनक भी नहीं लगी कि उनके बीच 27 मुकदमों का आरोपी फरार इनामी डाकू छिपकर रह रहा है। 
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