उफनाई यमुना में नए यमुना पुल से एक युवक-युवती ने शुक्रवार को छलांग लगा दी। सूचना मिलने पर कीडगंज पुलिस मौके पर पहुंच गई। गोताखोरों के साथ जल पुलिस की टीम देर-शाम तक उनकी गहरे नदी में तलाश करती रही लेकिन उनका कोई सुराग हाथ नहीं आया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सुबह करीब दस बजे एक युवक-युवती नैनी की ओर से सवारी वाहन से वहां पहुंचे। उसके बाद करीब पन्द्रह-बीस मिनट तक दोनों वहां खड़े होकर बातचीत करते रहे। अचानक दोनों रेलिंग पर चढ़ गए। उनको रेलिंग पर चढ़ता देख वहां मौजूद कुछ अधिवक्ता एवं गार्ड उनकी ओर शोर मचाते हुए लपके लेकिन तब तक दोनों ने उफनाई यमुना में छलांग लगा दी। युवक-युवती के यमुना में छलांग लगाते ही पुल पर हड़कंप मच गया। वहां तमाशबीनों की भीड़ जमा हो गई। मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। कुछ देर बाद गोताखोरों को भी बुला लिया गया। गोताखोरों ने यमुना पुल से लेकर अरैल घाट के आगे तक दोनों की तलाश करते रहे लेकिन उनका कोई भी सुराग हाथ नहीं आया। उधर, पुलिस को पुल पर भी दोनों से संबधिंत कोई वस्तु हाथ नहीं आई। इस वजह से दोनों के बारे में अधिक कुछ मालूम नहीं चल सका। कीडगंज इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा के मुताबिक दोनों के बारे में अन्य स्रोतों से भी जानकारी जुटाई गई लेकिन उनके बारे में अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है।
नए पुल से बहादुरगंज निवासी एक युवक चंदन सोनी 35 वर्ष पुत्र मुन्नूलाल शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे यमुना में कूद गया हालांकि उसे नीचे खड़े मल्लाहों ने बचा लिया। सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस भी पहुंच गई। कुछ देर बाद होश में आने पर उसने परिवार का पता बताया। पुलिस ने परिजनों को बुलाकर उसे परिवार के हवाले कर दिया। पुलिस के मुताबिक चंदन घरेलू कलह से परेशान चल रहा था। शुक्रवार को भी उसके परिवार में झगड़ा हुआ था। इससे ऊबकर वह यमुना पुल पहुंच गया और नदी में छलांग लगा दिया।
नया यमुना पुल पिछले काफी समय से सुसाईट प्वांइट बना हुआ है लेकिन इसके बावजूद यहां ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई भी पुख्ता इंतजाम अब तक नहीं किए गए। कहने को यहां सुरक्षा गार्ड लगाए गए हैं लेकिन महज एक सुरक्षाकर्मी पुल के बीच तैनात रहता है। सुसाईट करने वालों को नदी में कूदने से रोकने के लिए काफी समय पहले पुल के दोनों ओर जाली लगवाए जाने की बात भी शुरु हुई लेकिन तकनीकी वजहों से यह प्रस्ताव परवान नहीं चढ़ सका। उसके बाद से ऐसे लोगों की रोकथाम के लिए दूसरे सुरक्षा इंतजाम भी अब तक नहीं सुझाए जा सके हैं। एक सामान्य आकड़े के लिहाज से हर माह कम से कम आधा दर्जन लोग नदी में छलांग लगा देते हैं।