फाफामऊ विधानसभा सीट से बसपा के घोषित प्रत्याशी मनोज पांडेय और उनके एक दर्जन से ज्यादा साथियों के खिलाफ एक और आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता हरिकेश त्रिपाठी का आरोप है कि वह गद्दोपुर स्थित पंप पर गाड़ी में डीजल भरा रहे थे तभी तीन गाड़ियों में आए मनोज और उनके साथियों ने उन पर हमला किया। हथियारों की बटों से पीटा और जान से मारने की कोशिश की। कर्मचारियों ने घेरा तो वे धमकी देते चले गए। पुलिस ने मुकदमा लिख पेट्रोल पंप का सीसीटीवी फुटेज लिया है जिसमें पूरा वाकया दिख रहा है।
सिविल लाइंस में स्टेनली रोड निवासी अधिवक्ता हरिकेश त्रिपाठी कांग्रेस नेता भी हैं। वह प्रदेश युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। हरिकेश ने एफआईआर में लिखा है कि वह रविवार शाम शिवपुर मलाका में एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। वहां से लौटते वक्त वह गद्दोपुर स्थित शगुन पेट्रोल पंप पर अपनी फारच्यूनर गाड़ी में डीजल भराने के लिए रुके। उसी समय बसपा के फाफामऊ सीट से उम्मीदवार मनोज पांडेय दो फारच्यूनर और एक सफारी गाड़ी में साथियों संग वहां आए। हरिकेश का आरोप है कि गाड़ियों से मनोज पांडेय, सुभाष उपाध्याय, सागर उपाध्याय (करीमउद्दीनपुर गांव नवाबगंज निवासी), ड्राइवर पंकज, सीटू और एक दर्जन अज्ञात लोगों ने उतरकर उन पर हमला कर दिया।
उन्हें और उनके पुत्र परीक्षित त्रिपाठी, भाई अखिलेश त्रिपाठी, मित्र गिरिजेश सिंह, शिवजी मिश्रा को राइफल और बंदूक की बट से पीटते हुए जान से मार डालने की धमकी दी। पेट्रोल पंप कर्मचारी तथा आसपास के लोग जुटे तो मनोज और साथी गाड़ियों में बैठकर भाग गए। कुछ देर बाद सोरांव पुलिस पहुंची। पुलिस ने पंप में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी, जिसमें मनोज और उनके साथी हमला करते दिखे हैं।
अधिवक्ता की तहरीर पर पुलिस ने मनोज, सुभाष, सागर, पंकज, सीटू बाबा को नामजद करते हुए 12 अज्ञात के खिलाफ बलवा, मारपीट, गालीगलौज और धमकी का केस दर्ज किया है। बसपा नेता मनोज मूल रूप से नवाबगंज के हथिगहां के निवासी हैं और शहर के सिविल लाइंस स्थित एक अपार्टमेंट में रहते हैं। अधिवक्ता का आरोप है कि नामजद आरोपी शहर से नवाबगंज तक गाड़ियों में घूम रहे हैं मगर पुलिस उन्हें नहीं पकड़ रही। उनकी जान को खतरा बना है।
बसपा के विधानसभा उम्मीदवार मनोज पांडेय के खिलाफ पहले से कई आपराधिक केस हैं। छह माह पहले सोरांव थाने में एक दरोगा पर हमले समेत धोखाधड़ी के दो केस लिखे गए थे। नवाबगंज थाने में भी दो आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। कर्नलगंज में 1997 में कत्ल की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। कुछ समय पहले कौशाम्बी के फर्जी पते पर हासिल किए जाने की वजह से मनोज का शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त किया जा चुका है।