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थोड़ी सी सावधानी अपनाएं, बेटी को दरिंदगी से बचाएं

Fri, 20 May 2016 01:19 AM IST
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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बलात्कार - फोटो : concept photo
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बहरिया में घर के बाहर सो रही बालिका को उठाकर सामूहिक दुराचार। करछना में दुकान से लौट रही किशोरी को खेत में खींचकर दरिंदगी। टॉफी दिलाने के बहाने बच्ची को घर ले जाकर पड़ोसी युवक ने की हैवानियत। सोरांव में शौच के लिए खेत की तरफ गई युवती से बलात्कार। ये पिछले महीने भर में जनपद में हुई बलात्कार की कुछ घटनाएं हैं। हवस में अंधे लोग बस मौके की ताक में होते हैं। दरिंदगी की इंतेहा ये कि दो साल की मासूम भी वहशियाना हरकत का शिकार हो रही है। बाद में भले ही आरोपी को सजा मिले लेकिन पीड़ित को जिंदगी भर बलात्कार का दंश झेलना पड़ता है। जरूरत इस बात की है कि महिलाएं खुद और अपनी बेटी को हैवानों से सुरक्षित रखने के लिए हिफाजत के जरूरी उपाय अपनाएं। 
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पिछले दिनों करेली इलाके की एक घटना ने सबको झकझोर दिया था। घर के बाहर सो रही पांच साल की बालिका को आधी रात एक नशेड़ी उठाकर सुनसान में ले गया और हैवानियत कर डाली। भोर में लोगों ने बच्ची को खून से लथपथ बेहोश पड़ा देखा तो उठाकर उसकी मां के पास ले गए। वह कई दिन तक अस्पताल में भर्ती रही। अब भी गुमसुम रहती है। पांच रोज पहले शहर के अल्लापुर में गैंगरेप के बाद किशोरी की हत्या कर दी गई जिस पर बवाल हुआ। इससे पहले झूंसी इलाके की दो घटनाओं ने भी लोगों को दहलाया था। पहली घटना में सात साल की बालिका को उसके नशे में धुत चाचा ने छत पर ले जाकर दरिंदगी कर डाली। अस्पताल में बमुश्किल उसकी जान बची थी। दूसरी घटना में देर शाम पिता के लिए तंबाकू खरीदने दुकान की तरफ जा रही आठ साल की लड़की को खेत में खींचकर तीन युवकों ने ऐसी क्रूरता कर डाली कि उसकी जान चली गई। 

रेप की इन घटनाओं में कहीं न कहीं घरवालों की भी लापरवाही रही है। रिटायर्ड डिप्टी एसपी शिवनाथ सिंह कहते हैं कि रेप की ज्यादातर घटनाओं को टाला जा सकता है अगर थोड़ी सतर्कता बरती जाए। गांव, मुहल्ले और किसी भी घर के बाहर तो पुलिस हर वक्त मौजूद नहीं रह सकती इसलिए खासतौर से रेप के मामलों में पुलिस को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। समाज को देखते हुए इसके लिए खुद सावधानी बरतनी होगी। बेटी रात में घर के बाहर सो रही है तो साथ रहें। वह शौच के लिए घर से दूर खेत की तरफ जाए तो किसी को साथ भेजें या खुद साथ जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के तहत घर में शौचालय बनाकर भी बेटी के साथ ऐसी किसी अनहोनी के खतरे को टाला जा सकता है। 
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यह भी एक कड़वा सच कि रेप की नब्बे फीसदी से ज्यादा घटनाओं में परिवार, रिश्तेदार या पड़ोसी शामिल होता है। इसलिए कोई बेटी को किसी बहाने से बुलाकर ले जाने की कोशिश करे तो साफ इनकार करें। बच्चियों को भी इस बारे में समझाया जाना चाहिए कि बिना पूछे और घर में बताए किसी के साथ कहीं भी न जाएं भले ही वह पड़ोसी अंकल हो या भैया। तमाम घटनाओं में किराएदार या मकान मालिक के परिवार के किसी व्यक्ति ने बलात्कार किया।

दारागंज और मुट्ठीगंज में किराएदार युवकों ने ही रेप के बाद दो बच्चियों की हत्या कर दी थी। तीन महीने पहले कोतवाली इलाके में भी किराएदार युवक के खिलाफ छात्रा से रेप का केस दर्ज हुआ था। ऐसे में किराए पर रहते हों या घर में किराएदार हों तो भी बेटी का ख्याल रखने की जरूरत है। खासतौर से ग्रामीण इलाके में शाम ढलने के बाद बेटी को अकेले बाहर नहीं भेजें। एसपी सिटी राजेश यादव भी कहते हैं कि पुलिस तो सक्रिय रहती है लेकिन रेप की घटनाओं को महिलाएं खुद अपनी सावधानी से टाल सकती हैं क्योंकि दरिंदे आसपास होते हैं।

रेप की अधिकतर घटनाओं में आसपास के ही किसी व्यक्ति की भूमिका रहती है। कई बार पड़ोसी, खास रिश्तेदार और परिवार के भी लोग दरिंदगी में शामिल पाए गए। ऐसे में जरूरत है कि अपनी बेटी को इन करीबियों की हैवानियत से बचाने के लिए अभिभावक खुद सावधानी बरतें।
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