नब्बे के दशक के चर्चित हत्याकांड पूर्व विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित के केस में अभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन के पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। खुद सरकार का मानना है कि अभियुक्त करवरिया बंधुओं के खिलाफ अब तक जितने भी साक्ष्य आए हैं, वे इतने विश्वसनीय नहीं हैं कि उनके आधार पर आरोपियाें को दंडित किया जा सके। इसलिए सरकार ने कोर्ट से मुकदमा समाप्त करने की अनुमति मांगी है। जवाहर पंडित की हत्या में पूर्व विधायक उदयभान करवरिया, उनके भाई पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, पूर्व एमएलसी सूरज भान करवरिया और मामा रामचंद्र उर्फ कल्लू अभियुक्त हैं। शनिवार को शासन से इस बाबत निर्देश मिलने के बाद डीजीसी क्रिमिनल गुलाब चंद्र अग्रहरि के निर्देश पर विशेष अधिवक्ता रणेंद्र प्रताप सिंह ने मुकदमे की सुनवाई कर रहे एडीजे रमेश चंद्र के समक्ष प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर मुकदमे की कार्यवाही समाप्त करने की प्रार्थना की है। प्रार्थनापत्र पर सोमवार को सुनवाई होगी। वादी पक्ष के वकील ने प्रार्थनापत्र पर अपना पक्ष रखने के लिए अदालत से समय की मांग की है।
पहली बार शहर में गरजी थी एके-47
0 ट्रायल में अभियोजन के 18 और बचाव पक्ष के 65 गवाहों के हो चुके बयान
प्रयागराज। जवाहर यादव उर्फ पंडित की हत्या 13 अगस्त 1996 को सिविल लाइंस में अत्याधुनिक असलहों से की गई थी। यह जिले का पहला वाकया बताया जाता है, जब किसी हत्या में एके-47 का इस्तेमाल किया गया। वारदात सिविल लाइंस में शाम करीब छह बजे हुई थी। उस वक्त जवाहर यादव अपनी मारुति कार से रेलवे स्टेशन की ओर जा रहे थे। कॉफी हाउस के नजदीक उन पर अत्याधुनिक असलहों से गोलियां बरसाई गईं, जिसमें जवाहर पंडित और एक राहगीर सहित तीन लोगों की मौत हो गई थी।
घटना की जांच दो बार सीबीसीआईडी से कराई गई और केस का ट्रायल वर्षों लटका रहा। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। उदयभान करवरिया एक जनवरी 2014 से जेल में हैं, जबकि कपिलमुनि और सूरजभान 28 अप्रैल 2015 से बंद हैं। उनकी जमानत अर्जी कोर्ट से खारिज हो चुकी है। मुकदमे में अभियोजन की ओर से 18 गवाह और बचाव पक्ष की ओर से 65 गवाह पेश किए जा चुके हैं।
अभियोजन की नजर में इसलिए कमजोर है मुकदमा
1- वादी सुलाकी यादव के घटना स्थल पर होने संबंधी साक्ष्य और बयान विश्वसनीय नहीं हैं।
2- हत्या के वक्त नामजद अभियुक्तों की घटना स्थल पर उपस्थिति संदेह से परे साबित नहीं होती है।
3- वादी सुलाकी और जवाहर पंडित के रिश्तेदार रामलोचन के पास लाइसेंसी असलहे थे। दोनों का कहना है कि वे सुरक्षा के लिए जवाहर पंडित के साथ थे, मगर असलहे घर पर रखे थे। यह विश्वसनीय कथन नहीं है।
4- घटना के बाद वादी जवाहर पंडित को अस्पताल ले जाने के बजाए पुलिस के आने का इंतजार करता रहा, यह बात उसकी घटना स्थल पर उपस्थिति को संदिग्ध बनाती है।
5- घटना के वक्त कपिल मुनि करवरिया लखनऊ में थे, इसकी पुष्टि केंद्र सरकार के मंत्री कलराज मिश्र ने की है।
6- किसी भी स्वतंत्र साक्षी ने अभियुक्तों की घटना स्थल पर उपस्थिति की पुष्टि नहीं की है।
7- महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश ने भी मुकदमा समाप्त करने पर अपना अभिमत दिया है।