एलआईयू के दरोगा मोहम्मद सलीम के बेटे बीए के छात्र शहबाज खान और स्थानीय युवकों के बीच पिछले एक महीने में तीन बार मारपीट हो चुकी थी। सभी छात्रों को यह पता था। पिछले तीन रोज में ही दो बार उनके बीच झगड़ा हो चुका था। एक शादी समारोह में भी उनके बीच कहासुनी हुई थी। मगर किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि छात्रों के बीच का यह झगड़ा कत्ल और खूनखराबा में तब्दील हो जाएगा।
महेवा मेंलॉज के कमरे के भीतर शुक्रवार दोपहर ईसीसी में बीए दूसरे वर्ष के छात्र शहबाज खान और उसके सहपाठी समीर पर चाकुओं से हमले ने छात्रों को स्तब्ध कर दिया है। शहबाज की चाकू मारकर हत्या की खबर फैली तो बड़ी संख्या में उसके दोस्त और छात्र पहले जीवन ज्योति हॉस्पिटल फिर एसआरएन अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाऊस पहुंच गए। सब गम और गुस्से में थे। बड़ा भाई शहबाज खान तो लगातार रो-कलप रहा था।
शाम तक वाराणसी से तमाम रिश्तेदार भी आ गए। वे गम में डूबे और सदमे में थे। शहबाज के दोस्तों और लॉज में साथ रहने वाले छात्रों ने बताया कि महेवा पश्चिम पट्टी में ही रहने वाले फैज से उसकी दोस्ती थी। फिर उनके बीच खटास आ गई। इधर एक एक महीने के दौरान उनके बीच तीन बार मारपीट हो चुकी थी। एक दोस्त इरशाद ने बताया कि पिछले महीन उनके बीच डांडी में झगड़ा हुआ था। तीन रोज पहले वे शहर में एक शादी समारोह में गए थे। वहां भी फैज और शहबाज के बीच तीखी झड़प हुई थी। बुधवार रात खान चौराहे पर फैज की फर्नीचर शॉप के बाहर भी उनके बीच मारपीट हो गई थी। तब किसी तरह झगड़ा शांत किया गया था। मगर फैज और उसके दोस्त यूं शहबाज की हत्या कर सकते हैं, यह किसी ने सोचा भी नहीं था।
लॉज के भीतर बीए दूसरे वर्ष के छात्र शहबाज की हत्या और उसके दोस्त समीर को चाकू से गंभीर घायल करने की घटना के पीछे असल वजह क्या है? यह रहस्य बना है। दोस्तों ने पुलिस से कहा है कि फैज ने शहबाज से 15 हजार रुपये लिए थे। उसी पैसों के लिए फैज और शहबाज के बीच रंजिश हो गई थी। मगर पुलिस को दोस्तों से कुछ और भी जानकारी मिली है जिससे शक है कि कत्ल की वजह कुछ और है।