बेली अस्पताल से एसआरएन रेफर किए गए मरीज को अप्पे चालक ने बृहस्पतिवार रात लूट लिया। सिविल लाइंस बस अड्डे पर मरीज को उतारने के बाद मानवीयता को शर्मसार करने वाला लुटेरा चालक अप्पे लेकर भाग निकला। पत्नी और बेटे के साथ बीमार युवक बस अड्डे के पास खड़ा होकर अपनी किस्मत पर आंसू बहाने लगा। जेब में फूटी कौड़ी न होने पर वह पत्नी और बेटे की ओर निहार रहा था। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था। इलाज के लिए जो रकम गांव के लोगों से ली थी। वह भी लुटेरे ले गए। उसकी दु:ख भरी कहानी सुनकर एक युवक मानवीयता का परिचय देते हुए उसे एसआरएन अस्पताल ले गया और भर्ती कराने के बाद कुछ रुपये की मदद भी की। बीमार मरीज के साथ हुई लूट की घटना से स्थानीय लोगों में विक्रम चालकों के प्रति खासा आक्रोश था।
यमुनापार में कौंधियारा के बड़ोखर गांव का रामशरण मिश्र चाट-फुल्की का ठेला लगाकर गुजर-बसर करता है। लगभग एक पखवारा पहले उसके पेट में दर्द की शिकायत हुई। वह कुछ भी खाता तो उल्टी हो जाती थी। इस पर पांच दिन पहले वह पत्नी पूनम मिश्र और एक बेटे के साथ बेली अस्पताल खुद को दिखाने पहुंचा। पांच दिन तक इलाज के बाद उसे बेली अस्पताल से बृहस्पतिवार रात डॉक्टरों ने एसआरएन में इलाज क राने की सलाह दी। रात लगभग 11 बजे बेली अस्पताल के गेट से एक अप्पे में बैठा। अप्पे चालक ने उसे बैग और सामान सीट के नीचे रखने की सलाह दी। इसी दौरान चालक और खलासी ने रामशरण की जेब काट ली। सिविल लाइंस में उतरने के बाद रामशरण ने जेब में हाथ डाला तो पर्स गायब थी। पर्स में 13 हजार रुपये था। जो वह गांव के लोगों से उधार लेकर इलाज कराने आया था। जेब कटने की घटना से वह परेशान हो गया।
यह देखकर चालक से शिकायत करने लगा तो चालक उसे किराया न देने का अच्छा तरीका बताकर गाली देते हुए अप्पे लेकर भाग निकला। वह बस अड्डे पर परिवार वालों के साथ खड़ा होकर रो रहा था। जिसके बाद भीड़ जुट गई। उसकी दु:खभरी कहानी सुनकर हर शख्स की आंखों में आंसू आ गए। वहां मौजूद रामबाग के कारोबारी धर्मेंद्र कुमार सिंह उसकी मदद को आगे आए। धर्मेंद्र रामशरण को अपने साथ एसआरएन ले गए। वहां उसे भर्ती कराया और मदद के तौर दो हजार रुपये भी दिए
शहर में टेंपो चालक के लूट, छिनैती और जेबकतरने की घटना को अंजाम देने की घटना अक्सर सामने आती रहती है। अप्पे और टेंपो चालकों के मनमानी की प्रमुख वजह ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही है। ट्रैफिक पुलिस वसूली के चक्कर में इन सब घटनाओं को नजर अंदाज करती है। जिसके चलते आम जनता की फजीहत होती है। शहर के टेंपो चालक न वर्दी पहनते है, न उनकी वर्दी पर नेम प्लेट होता है। यहां तक की तमाम चालकोें की गाड़ी पर नंबर प्लेट तक नहीं होता है। पिछले साल एसपी ट्रैफिक की सख्ती के बाद चालकों ने वर्दी पहनना शुरू कर दिया था, लेकिन उनके जाते ही दोबारा चालकों की मनमानी शुरू हो गई।