लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे की वजह ट्रक ड्राइवर का मोबाइल देखना था। चालक हाईवे पर काफी तेज स्पीड में ट्रक चला रहा था। सुवंसा बाजार के पास जगतपुर मोड़ के पास पहुंचने पर अचानक उसका मोबाइल बजने लगा। वह मोबाइल पर नंबर देखने लगा, तभी ट्रक दाहिने से आ रहे टेंपो से जा भिड़ा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टेंपो बीस फिट ऊपर उछलकर गड्ढे में जा गिरा। टेंपो के परखचे उड़ गए। उसमें सवार महिलाएं खून से लथपथ होकर सड़क और गड्ढे में जा गिरीं। हादसे में टेंपो के पीछे आ रही पिकअप भी क्षतिग्रस्त हो गई।
शुक्रवार को सतना से ट्रक लेकर चालक महेंद्र निवासी ददौली थाना सोरांव जनपद इलाहाबाद सतहरिया जौनपुर जा रहा था। हाईवे पर वह काफी तेज स्पीड में ट्रक चला रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जगतपुर मोड़ के पास पहुंचने पर उसके मोबाइल की घंटी बजने लगी। वह मोबाइल पर आने वाली काल देखने लगा। तभी ट्रक दाहिने साइड से जा रहे टेंपो से जा भिड़ा। टक्कर लगने के बाद लगभग बीस फिट टेंपो ऊपर उछलकर नीचे गड्ढे में गिर पड़ा। खून से लथपथ महिलाओं की चीखपुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और फंसे लोगों को बाहर निकालने लगे। ट्रक की टक्कर से टेंपो के पीछे आ रही पिकअप भी क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के लिए लोग ट्रक चालक को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। फिलहाल चालक की एक चूक ने 11 लोगों की जिंदगियां छीन लीं।
सुवंसा से जिला अस्पताल तक चीखपुकार और कोहराम
फतनपुर थाना क्षेत्र के जगतपुर मोड़ पर हादसे में 11 श्रद्धालुओं की मौत की खबर मिलने पर उनके परिवार व गांव के लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे। वहां का नजारा देखने के बाद हर कोई सहम गया। घायलों को कराहते देख लोगों को कलेजा मुंह को आ गया। जगतपुर मोड़ से लेकर जिला अस्पताल की मर्चरी में शवों को देखने के बाद लोग बिलखते रहे। जो भी लाशों की दशा देखता, कांप जाता।
शवों को मैजिक डाला में भरकर भेज दिया जिला अस्प्ताल
फतनपुर के जगतपुर मोड़ के पास शुक्रवार को हुए हादसे की खबर पर पुलिस विभाग के अफसर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। आनन-फानन में घायलों को अस्पताल भेजा जाने लगा। सूचना के बाद भी समय पर एंबुलेंस नहीं मुहैया हो सकी। मृतकों के शवों को जानवरों की तरह मैजिक डाला में भरकर जिला अस्पताल भेजा गया। घटना की जानकारी के बाद भी गौरा सीएचसी में एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की जा सकी। हादसे में घायल मरीजों को एक साथ भेजा गया।
भरोसा न करा, प्राइवेट अस्पताल ले चला
जिला अस्पताल में हादसे में घायल निर्मला की हालत नाजुक देख परिवार का एक युवक रो रहा था। तभी उसके साथ आया युवक बोल पड़ा कि यहां के अस्पताल का भरोसा न करा, बल्कि प्राइवेट अस्पताल में ले चला। नाही तो धोखा हो जाई। उसकी आशंका सच साबित हुई और इलाहाबाद ले जाने के दौरान निर्मला की मौत हो गई।
पत्नी का शव देखने से पहले बेहोश हो गया पति
फतनपुर के जगतपुर मोड़ के पास हुए हादसे में मृत लखपत्ती देवी का पोता संजय सरोज पहले पहुंचा। दादी के शव से लिपटकर वह रोने लगा। बिलखते हुए कहता रहा कि अगर उसे पता होता तो उसे आने ही न देता। कुछ देर बाद वहां गुलाबचंद्र पहुंचा। वह अपनी पत्नी इंद्रावती का शव देखने का साहस नहीं जुटा सका और रोते हुए बेहोश हो गया। कुछ देर बाद शवों के ढेर में अपनी पत्नी को तलाशने पहुंचा। शव देखते ही वह बिलख पड़ा।
हमका बचा ला साहब, हम मर जाब
जिला अस्पताल लाई गई घायल नीलूका बुरा हाल था। वह लगातार चीख रही थी। उसके सामने मौत का मंजर था। वह इलाज कर रहे डाक्टर से कहती रही साहब हमका बचा ला, नाही तो हम मार जाब। परिवार के लोग भी उसे संभाल नहीं पा रहे थे।
एक टेंपो पर सवार थे 16 लोग
जिले में नियम कानून दरकिनार कर टेंपो व मैजिक से सवारियां ढोई जाती हैं। पड़ोसी जिलों में भी नियम कानून की धज्जियां उड़ाने में लोग पीछे नहीं है। शुक्रवार को जिस टेंपो में ट्रक ने टक्कर मारी, उसमें अधिकतम पांच लोगों को बैठाने का निर्देश है, लेकिन चालक ने ओवरलोडिंग करते हुए 15 लोगों को बैठा रखा था। एक जिले से दूसरे जिले में प्रवेश करते समय भी पुलिसकर्मियों ने अपनी आंखें बंद रखीं। इसका नतीजा यह हुआ कि एक साथ 11 लोगों की जान चली गई।
टेंपो पर चालक समेत पांच लोग को बैठाकर सवारियां ढोने का नियम है, टेंपो और मैजिक चालक प्रशासन के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पुलिसकर्मियों ने अपनी आंखें बंद कर रखी हैं। शुक्रवार को जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर के गौरेयाडीह सटवा से टेंपो पर 15 लोगों को बैठाकर चालक दीपक प्रतापगढ़ आ रहा था। रास्ते में कहीं भी पुलिसकर्मियों ने उसे रोकना मुनासिब नहीं समझा। नियम के विपरीत बैठाई गईं सवारियों को लेकर वह जौनपुर से प्रतापगढ़ जिले में प्रवेश कर गया। उसे कोई पूछने वाला नहीं मिला। नतीजा ट्रक की टक्कर से टेंपो में सवार 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। लोगों का कहना था कि यदि रास्ते में उसे पुलिस या फिर यातायात विभाग ने रोका होता तो एक साथ इतने लोगों की जान नहीं जाती। पुलिस को चालक के ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी नहीं मिल सकी।
डॉक्टरों ने देखा नहीं, पुलिस ने शवों को भेज दिया मर्चरी
लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर फतनपुर थाना के जगतपुर मोड़ के पास हुए हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने सात महिलाओं और एक बालक के शव को मैजिक डाला पर लदवाकर जिला अस्पताल भेज दिया। यहां शवों को डॉक्टरों को दिखाने की जरूरत नहीं समझी गई। उन्हें सीधे मर्चरी भेज दिया गया। डॉक्टरों ने भी चेक करने की जरूरत नहीं समझी।
जगतपुर मोड़ पर हादसे की खबर मिलते ही पुलिस भागकर मौके पर पहुंची। वहां सात महिलाओं और एक बालक का शव पड़ा था। सिपाहियों ने शवों को मैजिक पर लदवाया और जिला अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया। एंबुलेंस बुलाने की भी जरूरत नहीं समझी गई। मैजिक डाला से लाए गए शवों को डॉक्टरों को दिखाने के बजाए सीधे मर्चरी में ले जाकर रखवा दिया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने भी शवों को देखने की जरूरत नहीं समझी।
सीएचसी अधीक्षक सीएमओ को देते रहे दो मौतों की जानकारी
फतनपुर इलाके के जगतपुर मोड़ पर हुए इतने बड़े हादसे के बाद भी मरने वाले और घायलों की सटीक जानकारी प्रशासन और पुलिस को नहीं थी। खुद एसडीएम रानीगंज को दोपहर दो बजे तक यह नहीं पता था कि कितने लोग घायल हुए हैं और कितने लोग मरे हैं। गौरा सीएचसी अधीक्षक भी लापरवाह बने रहे। सीएमओ के पूछे जाने पर वह बार-बार दो लोगों की मौत की जानकारी दे रहे थे। सीएमओ भी डीएम को यही बता रहे थे कि दो लोगों की हादसे में मौत हुई है। डीएम ने जब सीएमओ को फटकार लगाते हुए दस मौतों की बात कही तो वह परेशान हो गए। उन्होंने सीएचसी अधीक्षक को फटकार लगाते हुए जानकारी मांगी तो पता चला कि अधीक्षक ओपी सिंह अस्पताल में ही नहीं थे। अन्य चिकित्सक घायलों का इलाज कर रहे थे। गंभीर रूप से घायल जब जिला अस्पताल पहुंचे तो सीएमओ व डिप्टी सीएमओ मौके पर पहुंचे।
पगली घंटी बजने के आधे घंटे बाद पहुंचे डाक्टर
प्रतापगढ़। ट्रक-टेंपो की भिड़ंत में घायल लोगों को गौरा सीएचसी से रेफर होने के बाद जिला अस्पताल लाया गया। एक साथ कई मरीजों के आने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने जिला अस्पताल में लगी पगली घंटी बजा दी। आधे घंटे के बाद दो ईएमओ, हड्डी के डॉक्टर के साथ सर्जन पहुंचे। स्टाप नर्स तो इमरजेंसी की ओर आना ही उचित नहीं समझीं। प्राइवेट एंबुलेंस चालक, स्वीपर व अन्य लोग घायलों को एक ओर जहां बेड पर भर्ती करवा रहे थे वहीं दूसरी ओर मरहम-पट्टी कर रहे थे।
चार घंटे बाद पहुंचे प्रधान व परिवार के लोगों ने की लाशों की शिनाख्त
शुक्रवार की सुबह फतनपुर इलाके में हुए भीषण हादसे के बाद मर्चरी लाए गए शवों की पहचान करने वाला कोई नहीं था। शवों की शिनाख्त को लेकर पुलिस और प्रशासन के लोग भी परेशान रहे। करीब चार घंटे बाद पहुंचे प्रधान व परिवार के लोगों ने मृतकों की शिनाख्त की। जिसके बाद शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। जिला अस्पताल में इमरजेंसी से लेकर मर्चरी तक अफरातफरी मची रही।
फतनपुर थाना क्षेत्र के जगतपुर मोड़ के पास ट्रक की टक्कर से टेंपो सवार 10 महिलाओं व एक बालक की मौत हो गई। टेंपो चालक समेत पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बालक समेत आठ लाशों को एक साथ मैजिक डाला से मर्चरी लाया गया। एक के ऊपर एक लादे गए शवों को मर्चरी में रखवाया गया। दोपहर करीब एक बजे पड़ोस के लोग अस्पताल पहुंचे। वह लाशों को देखने के बाद उसकी शिनाख्त नहीं कर पा रहे थे। बगल के रहने वाले लोग भी उनकी पहचान करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। शवों के ढेर में वे अपनों को खोजते रहे। हर चेहरे को ऐसे देख रहे थे कि उनके अपनों के मौत की खबर झूठी निकले। लगभग साढ़े तीन बजे अस्पताल पहुंचे मृतक के परिवार के लोगों के साथ गांव के प्रधान ने शवों की शिनाख्त कराई। इसके बाद आगे की कार्रवाई प्रारंभ हो सकी। करीब चार घंटे तक मर्चरी में शवों को पहचानने वाला कोई नहीं मिला। पुलिस भी मर्चरी की ओर आने वाले लोगों से परिवार वालों की जानकारी लेती रही।
वीभत्स शवों को देख कांप गई लोगों की रूह
फतनपुर थाना क्षेत्र के जगतपुर मोड़ के पास शुक्रवार को ट्रक की टक्कर से टेंपो सवार 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। एक साथ आठ शवों को मर्चरी में ले आया गया। घटनास्थल से लेकर मर्चरी तक वीभत्स शवों को देखने के बाद हर किसी की रूह कांप जा रही थी। किसी की आंख निकल गई थी तो किसी की हड्डियां चकनाचूर हो गई थीं। कई घायल महिलाओं का पेट भी फट गया था। सॉक एंड हैमरेज के साथ ही अधिक रक्तश्राव से ज्यादातर मौतें हुईं।
रानीगंज थाना क्षेत्र के सुलतानपुर बोर्रा स्थित रइया देवी मंदिर में निशान चढ़ाने के लिए हंसी खुशी घर से निकले लोगों पर वज्रपात हो गया। हादसे में मृत व घायलों की दशा देखकर लोगों की रूह कांप जा रही थी। बहुत से लोग लाशों को देखने का साहस तक नहीं जुटा सके। मर्चरी में रखे गए शवों की हालत बेहद खराब थी। किसी की आंख निकल गई थी तो किसी की हड्डियां चकनाचूर हो गई थीं। किसी महिला का पेट फट गया था। चेहरे भयावह लग रहे थे। बालक के सिर व चेहरे पर चोटें आई थीं। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों की मानें तो सभी की सॉक एंड हैमरेज व अधिक रक्तश्राव के कारण मौत हुई है। शरीर के ऊपरी हिस्से में मृतकों को चोटें आई थीं। कमजोर दिल वाले ग्रामीण भले अस्पताल पहुंचे, लेकिन लाशों को देखने से दूर रहे।
गड़वारा शुकुलपुर में 13 लोगों की मौत हो गई ताजा
जनपद के फतनपुर थाना क्षेत्र के जगतपुर मोड़ के पास शुक्रवार को हुई घटना इस साल की सबसे बड़ी दुर्घटना है। जिसमें ट्रक चालक की लापरवाही से 11 लोगों की जान चली गई। इस घटना ने गड़वारा शुकुलपुर मोड़ पर बोलेरो सवार 13 लोगों की ट्रक की टक्कर से हुई मौत की याद भी ताजा कर दी। शहर के आर्यन होटल में लगी आग में हुई 10 लोगों की मौत ने भी दहलाकर रख दिया था।
जगतपुर मोड़ के पास शुक्रवार को हुई घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया। अफरा-तफरी के बीच अस्पताल में लोगों के चीखने चिल्लाने से माहौल गमगीन बना रहा। बवाल की आशंका में अफसर भी डटे रहे। हादसे में 11 श्रद्धालुओं की मौत ने अंतू थाना क्षेत्र के गड़वारा शुकुलपुर मोड़ पर वर्ष 2012 में हुई घटना की याद ताजा कर दी। कंधई थाना क्षेत्र के दोहरी के लोग रायबरेली में किसी मजार पर मन्नत पूरी होने के लिए चादर चढ़ाने गए थे। वहां से लौटते समय बेकाबू ट्रक ने बोलेरो में टक्कर मार दी थी। जिससे उसमें सवार 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। 19 जून 2015 को शहर के आर्यन होटल में लगी आग में दम घुटने व झुलसने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। शुक्रवार को हुए भीषण हादसे में 11 लोगों की मौत के बाद इन घटनाओं की याद ताजा हो गई।
मदद को कौन कहे, केवल वीडियो क्लिप बनाने में रहे मशगूल
जिला अस्पताल के मर्चरी में मैजिक डाला से एक साथ आठ शवों को उतारा जाता रहा। हर ओर खून ही खून फैलने लगा। वाहन पर भी खून फैला हुआ था। इस बीच तमाशीबीनों का मजमा लगा रहा। वह मृतक व घायलों की मदद के बजाए केवल वीडियो क्लिप बनाने में धक्कामुक्की करते रहे। पुलिस उन्हें भगाती रही, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। लोग मोबाइल में कैद तस्वीरों व वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे।