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 पुलिस की चूक से आरोपी को मिली जमानत

Tue, 02 Aug 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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रास्ते के विवाद में गई महिला की जान - फोटो : demo pic
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व्यवसायी सुरेश शुक्ला के चर्चित हत्याकांड में पुलिस की चूक से हत्यारोपी को जेल की सलाखों से बाहर निकलने का मौका मिल गया है। जांच समय से पूरी कर आरोपपत्र दाखिल कर पाने में नाकाम रहने के कारण जिला अदालत ने जेल में बंद आरोपी कुलदीप शुक्ला को इसी आधार पर जमानत मंजूर कर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि  निर्धारित 90 दिन की अवधि तक विवेचक द्वारा आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल नहीं किया गया है। विवेचक के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोर्ट ने सीबीसीआईडी के अधिकारियों को लिखा है।
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यह आदेश स्पेशल सीजेएम सुशील कुमार ने दिया है।

मामला फूलपुर थाने का है। दो नवंबर 2015 को ट्रैक्टर एजेंसी संचालक  सुरेश शुक्ला की हत्या कर दी गई थी । जिसमें कुलदीप शुक्ला, अनिरुध पांडेय, प्रेम शंकर शुक्ला, पूरन चंद्र तिवारी और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था। अभियुक्त कुलदीप शुक्ला पुत्र प्रेम शंकर शुक्ला को 27 अप्रैल 2016 को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। 28 जुलाई को विडियो कान्फ्रेसिंग रिमांड के समय आरोपी ने उपस्थित होकर कहा कि वह 93 दिन से जेल में बंद है और अभी तक विवेचक ने आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है। उसने जमानत पर रिहा किए जाने की याचना किया । कोर्ट ने विधिक व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए अभियुक्त को दो लाख रुपए के व्यक्तिगत मुचलका और इतनी ही धनराशि की दो जमानते पेश करने पर रिहा करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 167(2) के प्रावधान का हवाला दिया है कि अभियुक्त ऐसे अपराध के संबंध में जो मृत्यु, आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास से दण्डनीय है को 90 दिन से अधिक की न्यायिक रिमांड मजिस्ट्रेट नहीं देगा और 90 दिन की अवधि के समाप्त होने पर यदि अभियुक्त जमानत देने को तैयार है तो उसे जमानत पर रिहा कर देगा ।
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वादी के अधिवक्ता प्रमोद त्रिपाठी का कहना है कि विवेचक ने जानबूझ कर अभियुक्त को लाभ पहुंचाने के लिए आरोप पत्र नहीं भेजा है। जबकि अभियुक्त की जमानत सत्र न्यायालय में सुनवाई के लिए लंबित है। अन्य अभियुक्तों के मामले में आरोप पत्र स्थानीय पुलिस द्वारा दाखिल किया जा चुका है।

जिला न्यायालय ने पूर्व महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र सुधीर श्रीवास्तव के खिलाफ हेर फेर कर रिश्तेदार को अनुचित लाभ पहुंचान के मामले में जांच का निर्देश जिलाधिकारी को दिया है।
यह आदेश सीजेएम रेशमा प्रवीण ने दिया है।

मामले के अनुसार अल्लापुर जार्जटाऊन निवासी शशिकांत दुबे ने जिला उद्योग केंद्र के तत्कालीन महाप्रबंधक सुधीर श्रीवास्तव के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत मुकदमा दर्ज करने की अर्जी दिया है। वादी का कहना है कि उसे उद्योग लगाने के लिए औद्योगिक क्षेत्र नैनी में प्लाट का आवटंन किया गया था । जिस पर उसने बाउंड्री और शेड का निर्माण कराया था । उद्योग केंद्र के असहयोग के कारण वह उत्पादन शुरु नहीं कर सका । इसी बीच महाप्रबंधक ने उसका आवंटन निरस्त करा दिया और प्लाट का आवंटन कम दाम पर अपने रिस्तेदार के पक्ष में करा दिया है। इससे सरकार को राजस्व की भी क्षति हुई है।  विपक्षी वर्तमान में आयुक्त उद्योग फिरोजाबाद में तैनात है। अदालत ने प्रकरण की जांच  किसी सक्षम अधिकारी से कराए जाने के लिए डीएम को निर्देश दिया है और जांच रिपोर्ट 30 अगस्त तक देने को कहा है।
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