दायराशाह अजमल का रहने वाला आफताब नाटे फरार होने के बाद 32 साल तक मौलाना करीम बनकर कभी अजमेर शरीफ तो कभी मुंबई और सूरत की दरगाह और मसजिदों में रहा। मोटी रकम लेकर करीब 35 महिलाओं के साथ हलाला किया। उसने अपनी पहचान मौलाना करीम के नाम से बनाई, लेकिन कहीं पर भी अपना पहचानपत्र तक नहीं बनवाया। इन शहरों की दरगाहों में झाड़, फूंक, गंडा ताबीज बांटकर दौलत भी जुटाई।
दर्जन भर से अधिक सार्गिद बनाए और सैकड़ों मरीद भी बने। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए हर महीने सिम बदल लेता था। परिवार में पत्नी और बच्चों से भी संपर्क रखे हुए हुआ था। एसपी सिटी सिद्धार्थ मीना ने बताया कि अफताब को परिजनों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लेने पर ही गिरफ्तार किया जा सका है। एसपी सिटी ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि आफताब ने फरारी 32 साल में मुंबई, सूरत और अजमेर शरीफ के हर जगह मोहल्ले की पूरी जानकारी थी। अजमेर शरीफ में तो मौलाना करीम के नाम से अच्छी खासी पहचान बना ली थी। इलाहाबाद के दायराशाह अजमल में साल भर के अंदर एक या दो बार आया करता था।
आफताब उर्फ नाटे 1981 में थाना शाहगंज के नखास कोना निवासी अजमत की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 1983 में जिला न्यायालय से आजन्म कारावास की सजा हुई थी। जिसके विरुद्ध आफताब ने हाईकोर्ट में अपील की और जमानत पर रिहा हो गया। 1985 मेंइलाहाबाद से फरार हो गया। पांच साल पहले इस केस को हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और उसे पेश करने के आदेश पुलिस को किए तो पता चला कि वह फरार है। इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने एसएसपी को तलब किया और तीन महीने के अंदर आफताब को अदालत में पेश करने के आदेश किए थे। उसी के बाद एसएसपी ने इसे फरार घोषित कर 12 हजार का इनाम घोषित किया। गिरफ्तारी के लिए परिजनों पर दबाव बनाया तो उन्होंने कहा कि वह तो पत्नी और बेटे पर तेजाब फेंककर भाग गया था। जबकि हकीकत में परिजनों की मोबाइल पर बात होती रहती थी।
आफताब उर्फ नाटे कुख्यात अपराधी चांद बाबा के कारोबार और अपराध की दुनिया में भी रहा है। 1989 में इलाहाबाद पश्चिमी विधान सभा से अतीक अहमद चुनाव जीते और चांद बाबा हार गया था। इस चुनाव के कुछ महीने चांद बाबा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आफताब नाटे ने चांद बाबा के चूड़ी बेचने, और होली पर रंग के कारोबार के साथ - साथ 1989 में इलाहाबाद पश्चिमी से चांद बाबा के चनाव में अहम भूमिका निभाई थी। चांद बाबा की हत्या के बाद आफताब समझ गया कि अब इलाहाबाद में रहना ठीक नहीं है और वह फरार हो गया था।