धूमनगंज की केंद्रांचल कालोनी में विवेक सिंह की हत्या के आरोपी तीनों दोस्तों को बुधवार को जेल भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि उसे पांच गोलियां मारी गईं थीं। आज उसका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस मुख्य आरोपी सिद्धार्थ की तलाश में छापेमारी कर रही है। उसके परिजनों से पूछताछ हुई है।
रम्मन का पुरवा के रहने वाले प्रापर्टी डीलर विवेक सिंह की हत्या में पकड़े गए मनोज सिंह, नरेंद्र और अमरदीप को बुधवार को जेल भेज दिया गया। इससे पहले पुलिस ने उनसे घटना को लेकर लंबी पूछताछ की थी। पुलिस जानने का प्रयास कर रही थी कि सोमवार की रात में ही ऐसा कुछ हुआ था या फिर सिद्धार्थ और विवेक में पहले से ही अनबन थी। तीनों से अलग-अलग पूछताछ की गई, लेकिन सबने एक ही बात बताई। सिद्धार्थ का मोबाइल खो जाने पर ही विवाद की शुरुआत हुई थी। विवेक और सिद्धार्थ में हाथापाई हुई तो विवेक गिर पड़ा।
इसके बाद सिद्धार्थ ने अपनी पिस्टल से उस पर फायरिंग करना शुरू कर दिया। सब इतनी तेजी से हुआ कि वहां मौजूद कोई भी दोस्त कुछ कर नहीं पाया। इंस्पेक्टर एके त्यागी ने बताया कि मनोज, नरेंद्र और अमरदीप ने न सिर्फ न सिर्फ साक्ष्यों को छुपाया, बल्कि लाश को 17 किलोमीटर दूर फेंक आए। मुख्य आरोपी सिद्धार्थ अपना मोबाइल बंद कर फरार है। उसके घर वालों से कई बार पूछताछ हो चुकी है। उसके संभावित ठिकानों पर पुलिस दबिश दे रही है। उसके पकड़े जाने के बाद ही पता चलेगा कि विवेक से उसका पहले से कोई विवाद था या वहीं पर हुआ था।
विवेक के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद आज अंतिम संस्कार कर दिया गया। रिपोर्ट से पता चला है कि उसे पांच गोलियां मारी गई थीं। एक उसके शरीर में मिल गई। बाकी आरपार हो गईं थीं। विवेक के भाई अमित सिंह ने बताया कि घरवाले विवेक के दोस्त सिद्धार्थ के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं। जब विवेक ने ठेकेदारी शुरू की तभी उसकी जान पहचान सिद्धार्थ सिंह से हुई। पता चला है कि वह मूल रूप से मेजा का रहने वाला है।