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दिव्यांग बच्ची को जन्म देने पर मिली यातना

Sun, 21 Feb 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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दिव्यांग यानी शारीरिक रूप से अक्षम बच्ची को जन्म देना एक महिला के लिए मुसीबत बन गया। बच्ची के जन्म के कुछ समय बाद ही महिला को मारपीट कर मायके भेज दिया गया। धमकी दी गई कि बच्ची के इलाज की खातिर तीन लाख रुपये लेकर आना वरना जान से मार डाला जाएगा। डेढ़ साल से मायके में टिकी महिला की फरियाद पर अतरसुइया थाने में पति और सास-ससुर समेत छह लोगों पर केस लिखा गया है।
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खुल्दाबाद में गुलाबबाड़ी कब्रिस्तान में रहने वाली तस्लीम फातिमा के पिता मुख्तार अहमद का इंतकाल हो चुका है। अप्रैल 2014 में उसका निकाह कोलहन टोला अतरसुइया में रहने वाले मोहम्मद जुनैद उर्फ मिक्की के साथ किया गया था। आरोप है कि शादी के दूसरे रोज से ही तस्लीम को शादी में दहेज कम लाने का ताना देकर यातना दी जाने लगी। शादी के साल भर बाद उसने बेटे योहान और अगले साल जुलाई 2014 में बेटी शुगरा को जन्म दिया। बच्ची दिव्यांग थी। इस पर ससुराल वाले और भड़क उठे। 
अस्पताल से नवजात के साथ घर पहुंचते ही तस्लीम को पीटा गया। साथ ही दोनों बच्चों समेत उसे मायके भेज दिया गया। तस्लीम से कहा गया कि दिव्यांग बच्ची के इलाज की खातिर तीन लाख रुपये लेकर ही आना। पिता के निधन के बाद तस्लीम का ब्याह उसकी मां ने जैसे-तैसे किया था। ऐसे में वह ससुरालियों की अतिरिक्त मांग नहीं पूरी कर सकी तो उन्होंने तस्लीम को ससुराल जाने से मना कर दिया। 
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कई बार थाने जाने पर भी जब तस्लीम को न्याय नहीं मिला तो वह अटाला में रहने वाले समाजसेवी दिलशाद मंसूरी से मिली। तस्लीम की व्यथा सुनकर दिलशाद उसे सीओ थर्ड के पास ले गए। सीओ के आदेश पर अतरसुइया थाने में तस्लीम के पति जुनैद उर्फ मिक्की, ससुर अब्दुल गफ्फार उर्फ चंदा पहलवान, सास किश्वरी बेगम, ननद नसरीन, फरजाना और जेठ पप्पू के खिलाफ दहेज के लिए उत्पीड़न, मारपीट, गालीगलौज का नामजद केस लिखा गया। पुलिस का कहना है कि जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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