माध्यमिक शिक्षा परिषद में दो लोगों को फर्जी पत्र के आधार पर नियुक्ति का मामला सामने आया है। इटावा और वाराणसी के इस मामले में दोनों व्यक्तियों को पहले सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद लखनऊ की ओर से साक्षात्कार पत्र जारी किया गया। उसके बाद निदेशक और अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग के हस्ताक्षर से नियुक्ति पत्र दे दिया गया। फर्जीवाड़े का अंदेशा होने पर इन व्यक्तियों ने वाराणसी के कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई। सोमवार को कैंट थाने की पुलिस यूपी बोर्ड मुख्यालय में इसका सत्यापन करने पहुंची।
दोनों मामले वर्ष 2010 एवं 2011 के हैं। वाराणसी ग्राम बलिरामपुर पोस्ट हसमपुर निवासी बबिता मिश्रा पत्नी संजय मिश्रा को सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद लखनऊ के हस्ताक्षर से 17 दिसंबर 2010 को साक्षात्कार के लिए तथा निदेशक एवं अपर निदेशक के हस्ताक्षर से 18 मई 2011 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया, जिसमें सहायक लिपिक के पद पर राजकीय इंटर कॉलेज इटावा में नियुक्त किए जाने का जिक्र है। इसी तरह वाराणसी के ग्राम छतरीपुर पोस्ट शिवपुर के हृदय नारायण मिश्रा पुत्र अच्युदानंद मिश्रा को 24 मार्च 2011 की तिथि में लिपिक पद पर नियुक्ति के संबंध में पत्र जारी हुआ।
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद लंबा समय बीत जाने के बावजूद इन दोनों को तैनाती नहीं मिली तो उन लोगों ने वाराणसी के कैंट थाने में एक जनवरी को फर्जीवाड़े के मामले में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद वाराणसी के एसएसपी की ओर से सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद लखनऊ को पत्र लिखा गया जानकारी मांगी गई तो वहां से बताया गया कि सचिव कार्यालय इलाहाबाद में स्थित हैं, जबकि लखनऊ में माध्यमिक शिक्षा निदेशक का शिविर कार्यालय है। सोमवार को कैंट थाने की पुलिस ने यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव से संपर्क किया। सचिव ने पुलिस को फर्जी साक्षात्कार और नियुक्ति पत्र के संबंध में लिखकर दे दिया।