कीडगंज के बाई का बाग में ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली फर्म को जालसाजों ने डेढ़ लाख रुपये का चूना लगा दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय का आईएएस बनकर 33 हजार सिलेंडर की सप्लाई का आर्डर दिया और सिक्योरिटी मनी के रूप में डेढ़ लाख रुपये खाते में ट्रांसफर करा लिए। फर्म के मालिक को कुछ घंटों बाद पता चला कि उन्हें ठग लिया गया। कीडगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
बाई का बाग के रहने वाले धर्मेंद्र कुमार केसरवानी की पत्नी संध्या की सिद्धार्थ इंटरप्राइजेज के नाम से फर्म है। फर्म से ऑक्सीजन सिलेंडर समेत तमाम मेडिकल उपकरणों की थोक सप्लाई की जाती है। पिछले 14 अगस्त को संध्या के मोबाइल पर एक कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को ए. रंजन आईएएस मिनिस्ट्री आफ हेल्थ लखनऊ बताते हुए कहा कि गोरखपुर में बाबा राघवदास मेडिकल अस्पताल में सिलेंडर की कमी से बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय बड़ी संख्या में सिलेंडर खरीद रहा है। पूछा कि क्या वह 33 हजार ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई तुरंत कर सकती हैं।
संध्या तुरंत तैयार हो गईं। कथित आईएएस ए. रंजन ने कहा कि सिक्योरिटी मनी के रूप में एक लाख 44 हजार आठ सौ 67 रुपये की डीडी बनवाकर दो घंटे में लखनऊ भेज दें। अगर यह संभव नहीं तो खाते में रुपये ट्रांसफर कर दें। संध्या ने पति से बात की और सविता नाम की किसी महिला के खाते में रुपये ट्रांसफर कर दिए। ए. रंजन ने शाम तक 33 हजार सिलेंडर की पेशगी के रूप में 40 लाख रुपये ट्रांसफर का वादा किया। शाम तक जब फोन नहीं आया तो उसके मोबाइल पर कॉल की गई। मोबाइल बंद मिला। इलाहाबाद से लखनऊ तक जानकारी करने के बाद पता चला कि ए. रंजन नाम का कोई आईएएस नहीं है। 18 अगस्त को धारा 419, 420 और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। उद्योग व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष शैलेंद्र गुप्ता ने व्यापारियों के साथ इस तरह की जालसाजी की घटना की निंदा करते हुए जल्द खुलासे ही मांग की है।
कीडगंज के ही कृष्णानगर की रहने वाली पूनम सिंह का आईसीआईसीआई बैंक में चालू खाता है। 17 अगस्त को दिन में तीन बजे पहला मैसेज आया। उसमें 20 हजार रुपये निकलने की बात थी। इसके बाद हर तीन मिनट पर छह मैसेज आए और खाते से एक लाख 95 हजार निकल गए। पूनम को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। बैंक जाकर उन्होंने खाता संचालन पर रोक लगाई तब तक जालसाजों ने अपना काम कर लिया था। घटना की एफआईआर कीडगंज में हुई है।