रास्ते के विवाद में गई महिला की जान
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जूड़ापुर हत्या कांड के पांचों आरोपियों के नारको टेस्ट से पुलिस को मुकदमे में कोई खास मदद नहीं मिल सकेगी। इन आरोपियों का 10 दिन तक विधि विज्ञान प्रयोगशाला में विशेषज्ञों ने परीक्षण किया। मुकदमे से जुड़े सवाल भी किए गए लेकिन उनसे हत्या को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी न मिलने के संकेत मिले हैं। टेस्ट से पहले पुलिस यह मानकर चल रही थी कि नारको टेस्ट से खुलासे के लिए अहम जानकारी मिलेगी।
नवाबगंज थाने के गांव जूड़ापुर में 24 अप्रैल की रात एक परिवार की दो लड़की और माता पिता की सिर कूचकर हत्या कर दी गई थी। इस परिवार की बड़ी बेटी से दुष्कर्म की पुष्टि भी हुई थी। मृतक के बेटे ने गांव के ही पांच लोगों को रंजिश के आधार नामजद करा दिया था। पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। लेकिन अभी तक पुलिस इन आरोपियों से यह खुलासा नहीं कर पाई है कि हत्या के पीछे कारण क्या रहा था। हत्या के खुलासे से लिए म़तक के बेटे मुख्यमंत्री तक से गहार लगा चुके हैं। सरकार ने भी इस खुलासे की एसटीएफ को जिम्मेदारी सौंपी है।
लखनऊ से आई एसटीएफ 21 दिन से प्रयास कर रही है। गांव में एक सप्ताह तक डेरा डाला। हर व्यक्ति से अलग अलग जानकारी जुटाई गईं। लेकिन खुलासा तो अलग सुराग तक नहीं लग पाया है। हालांकि गांव के एक चश्मदीद व्यक्ति ने घर के आसपास गाड़ी आते जाते देखी थी। गाड़ी का नंबर क्या था और उसमें कौन था उसकी चश्मदीद व्यक्ति से पुष्टि नहीं हो पाई। एसटीएफ का कहना है कि गाड़ी में बैठे व्यक्ति का चेहरा भी देखा होता तो उसकी मदद से गाड़ी में बैठे व्यक्ति का स्केच बनवाकर असली हत्यारों की गिरफ्तारी आसान हो सकती थी।