करछना पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहीत हो जाने और बच्चों के बेरोजगार रह जाने के गम से कचरी के एक किसान ने बुधवार को (होली के दिन) दम तोड़ दिया। त्योहार के दिन किसान की मौत से गांव में मातम पसरा है। करछना पावर प्लांट के विरोध में पूर्व में हुए आंदोलन में शामिल होने वाले दर्जनों किसान भी जेल में हैं या प्रशासन की कार्रवाई के भय से गांव छोड़कर भागे हुए हैं, सो होली के दिन उनके घरों में भी सन्नाटा पसरा रहा और उनके परिवार वालों के किलए लिए होली बेरंग रही।
करछना पावर प्लांट के लिए अधिग्रहीत भूमि पर चहारदीवारी का निर्माण जारी है। पावर प्लांट के लिए जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई, उनमें कचरी के किसान संगम लाल भी शमिल थे। संगम लाल के पास तीन बीघा जमीन थी। पावर प्लांट के लिए दो बीघा जमीन ले ली गई और दस बिस्वा जमीन रेलवे ने अधिग्रहीत कर ली। संगम लाल के तीन बेटे हैं। दो बेटे स्नातक हैं, जबकि तीसरा बेटा हाईस्कूल कर चुका है। जमीन अधिग्रहीत हो चुकी है और बेटे बेरोजगार हैं।
संगम लाल को अंदर ही अंदर यही गम खाए जा रहा था। परिजनों ने बताया कि वह पूरी तरह से स्वस्थ थे लेकिन होली के दिन उनका चेहरा उतारा हुआ था। त्योहार पर आर्थिक तंगी झेल रहे संगम लाल परिवार वालों से बार-बार कह रहे थे कि बच्चों के भविष्य का क्या होगा।सरकार ने जमीन तो ले ली लेकिन परिवार के किसी सदस्य को नौकरी नहीं दी।
अफसरों ने वादा किया था कि पावर प्लांट के निर्माण कार्य में योग्यता के अनुसार प्रभावित परिवारों के सदस्यों को रोजगार मुहैया कराया जाएगा, लेकिन वक्त के साथ अफसर अपना वादा भूल गए। परिवार वालों के मुताबिक इसी गम में होली के दिन संगम लाल को हार्ट अटैक हुआ और उनकी मौत हो गई। इससे कचरी गांव में मातम पसर गया। कचरी सहित आसपास के गांव में रहने वालों दर्जनों किसानों के खिलाफ प्रशासन मुकदमा भी दर्ज करा चुका है और किसान जेल में बंद हैं। होली पर उनकी गैरमौजूदगी से घरों में सन्नाटा पसरा रहा और उनके परिवार वालों ने होली नहीं मनाई।