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वाट्सएप डीपी से फोटो उड़ाकर शूटरों को कराई पहचान

Sat, 26 May 2018 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद क्राइम - फोटो : self
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अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव की हत्या के लिए कातिलों ने फुलप्रूफ इंतजाम किया था। हत्या की योजना घटना के करीब 15 दिन पहले ही बना ली गई थी। गाड़ी से लेकर तमंचे तक, शूटरों के होटल में रुकने से लेकर उनके खाने पीने के इंतजाम तक, ऐसा प्लान बनाया गया था कि किसी को भी इसके बारे में भनक तक नहीं लगी। शूटर अधिवक्ता को कैसे पहचानेंगे, इसके लिए अधिवक्ता के वाट्सएप की डीपी से फोटो कापी की गई और  शूटरों को यही फोटो देकर पहचान कराई गई। उससे पहले शूटरों ने अधिवक्ता को सीधे नहीं देखा था।
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होटल से जुड़ा विवाद कई महीनों से चल रहा था। एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि एक दिन घनश्याम होटल में बैठकर शराब पी रहा था। इसी दौरान प्रदीप ने घनश्याम से वकील राजेश श्रीवास्तव को रास्ते से हटाने को कहा। बताया कि राजेश ने जीना हराम कर दिया है। अगर वह पीआईएल करता है तो होटल गिराने तक की नौबत आ सकती है।  घनश्याम की झूंसी में रहने वाले शातिर अपराधी अंजनी श्रीवास्तव उर्फ भैया जी से दोस्ती थी। उसने अंजनी से शूटरों का इंतजाम करने को कहा। अंजनी ने प्रतापगढ़ के जोगापुर के रहने वाले अपने करीबी शमशाद से संपर्क किया। उसने हामी भरी ली। इसके बाद 22 अप्रैल से अंजनी और शमशाद मोबाइल से लगातार संपर्क में थे। 23 अप्रैल को शमशाद इलाहाबाद आया तो रामबाग में अंजनी और घनश्याम के साथ उसने पूरा प्लान तैयार कर लिया।

उसी दिन शमशाद को राजेश की गली में ले जाकर उनका घर दिखाया गया। जांच में जुटी वाराणसी एसटीएफ को शमशाद के बारे में पता चला तो मोबाइल नंबर के ही माध्यम से वह जोगापुर के रईस और गोपालपुर के विशाल विश्वकर्मा के बारे में पता चल गया। हत्या से पहले वे लगातार आपस में बात कर रहे थे। एसटीएफ जब उनके घर पहुंची तो वे फरार थे। इससे शक और गहरा गया। गुरुवार को सोरांव में मुठभेड़ के बाद शमशाद, रईस और विशाल को पकड़ा गया तो पूरे मामले का खुलासा हो गया। शमशाद ने बताया कि रईस ने चोरी की बाइक प्रतापगढ़ के अमन पांडेय से खरीदी थी। घटना से एक दिन पहले घनश्याम ने खुद भी एक नया मोबाइल लिया और एक सिम शमशाद को दिया। कहा अब नए नंबर से ही बात होगी। अंजनी ने दो देशी कट्टों का इंतजाम किया और एक बैग में दोनों तमंचों को डालकर रईस और विशाल को दे दिया था। घटना वाले दिन शमशाद राजेश की गली में खड़ा होकर उनकी एक एक गतिविधि की जानकारी शूटरों को देता रहा। हत्या के बाद शमशाद ही उन्हें कार से वापस प्रतापगढ़ लेकर गया।
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राजेश की हत्या के बाद दोनों शूटरों ने बाइक विकास भवन के पास खड़ी की और सबसे शमशाद को हत्या की जानकारी दी। शमशाद ने उन्हें पैदल ही लक्ष्मी टाकीज चौराहा आने को कहा। शमशाद ने घनश्याम और अंजनी को भी वहीं बुला लिया। चारों वहीं एक चाय की दुकान पर बैठे। घनश्याम ने दो लाख रुपये निकालकर शमशाद के हाथ में रखा। हत्या के बाद लक्ष्मी टाकीज चौराहे पर दिनदहाड़े लेन देन होता रहा। शमशाद ने बताया कि घनश्याम ने उसे ईनाम के तौर पर दो लाख और भी देने का वादा किया था। वह नहीं जानता कि घनश्याम ने होटल मालिक से सुपारी की कितनी रकम ली थी। उसे सिर्फ इतना कहा गया था कि दो लाख हत्या के तुरंत बाद मिलेंगे। बाकी दो लाख ईनाम के बाद में दिए जाएंगे।

झूंसी का रहने वाला अंजनी श्रीवास्तव शातिर अपराधी है। उसके इलाहाबाद के सभी बड़े अपराधियों के संबंध हैं। एसटीएफ एसएसपी ने बताया कि अंजनी श्रीवास्तव की ससुराल प्रतापगढ़ में है। उसकी बहन शमशाद के गांव जोगापुर में ब्याही है। यहीं पर अंजनी की मुलाकात शमशाद से हुई थी। दोनों में दोस्ती हुई तो अंजनी ने मोबिल की दुकान भी गांव में खोल ली थी। हालांकि दुकान नहीं चली तो अंजनी ने दुकान बंद कर दी लेकिन शमशाद से संपर्क बना रहा।


राजेश श्रीवास्तव ने होटल मालिक के खिलाफ एक ऐसी लड़ाई लड़ी जिसने उनकी जान ले ली। राजेश ने मुहल्ले के विवाद को अपना विवाद बना लिया था। दोस्त बताते हैं कि उनके जैसा साथी मिलना नामुमकिन है। उनकी मौत से उनके घर वाले, दोस्त, करीबी सब हाथ मलते रह गए। जिन जिन लोगों का नाम सामने आया, उसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

होटल क्राउन पैलेस के पीछे नाले पर अतिक्रमण कर स्लैब बना लिया गया तो बरसात के दिनों में मुहल्ले में पानी भरने लगा। सारा मुहल्ला विरोध में आ गया था लेकिन कोई सामने आने की हिम्मत नहीं कर रहा था। आखिरकार राजेश सामने आए और खुलकर होटल मालिक का विरोध करने लगे। नगर निगम से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक उन्होंने कोई आफिस नहीं छोड़ा जहां शिकायत न की हो। उन्होंने होटल में पार्किंग न होने से लेकर अन्य अनियमितताओं की भी शिकायत की। इस बार तो उन्होंने तय कर लिया था कि हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करेंगे।  बार बार जांच आती रही। होटल मालिक हर बार अपने रसूख से बच जाता। लड़ाई बढ़ती गई और इस हद तक पहुंच गई कि उन्हें जान गंवानी पड़ी। उनके करीबी दोस्त अधिवक्ता पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि राजेश का व्यक्तित्व बेदाग था और मरते दम तक बेदाग रहा। राजेश ने मुहल्ले की लड़ाई व्यक्तिगत होकर लड़ी। टिंबर व्यवसायी मुकेश केसरवानी ने कहा कि वह यारों के यार थे। ऐसा आदमी ढूंढने से नहीं मिलेगा जो जरूरत पड़ने पर रात दो बजे भी तैयार रहता था। सभासद प्रत्याशी रहे शैलेंद्र गुप्ता ने कहा कि होटल का विवाद कई बार उनके सामने आया। वह कल्पना नहीं कर सकते थे कि इस मामले में राजेश की हत्या हो सकती है। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।

एडीजी आनंद कुमार ने बताया कि इस चर्चित हत्याकांड का खुलासा करने में एसटीएफ की टीम ने अथक प्रयास किया है और त्वरित गति से मामले का पर्दाफाश करते हुए हत्यारों को धर दबोचा है। इसके लिए डीजीपी द्वारा एसटीएफ की टीम को पुरस्कृत करने और टीम के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देने का फैसला लिया गया है। हत्याकांड के खुलासे में एसटीएफ वाराणसी के डिप्टी एसपी विनोद कुमार सिंह, इंस्पेक्टर शैलेश प्रताप सिंह, विपिन राय, पुनीत परिहार और अमित श्रीवास्तव की अहम भूमिका रही है।
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