व्यावसायिक भवनों पर प्रमोशनल सरचार्ज की वसूली का मामला निपटाने के बाद अब नगर निगम शहर में गंगा-यमुना के किनारे कछारी इलाकों में बने मकानों को गृहकर के दायरे में लाने की तैयारी कर रहा है। इस संबंध में नगर निगम सदन से प्रस्ताव भी पारित हो चुका है। निगम प्रशासन की योजना कछारी इलाकों में बने मकानों का नए वित्तीय वर्ष में सर्वे कराके गृहकर निर्धारित करने की है। ऐसा होने से निगम की गृहकर से आय में 15 से 18 करोड़ रुपये के इजाफे का अनुमान है। आर्थिक संकट झेल रहे नगर निगम के लिए यह आय वरदान साबित होगी।
बमरौली से नेवादा, अशोक नगर, गंगा नगर, ऊंचवागढ़ी, बेली गांव, मेहंदौरी, शिवकुटी, चिल्ला, सलोरी, बघाड़ा, दारागंज समेत करेलाबाग, शम्स नगर आदि मोहल्लों के कछारी हिस्से में तकरीबन 19 हजार मकान हैं। इनमें से ज्यादातर मकान टैक्स के दायरे में नहीं हैं, जबकि सभी मोहल्लों में नगर निगम की ओर सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। निगम से सुविधाएं ले रहे यहां के लोगों से गृहकर वसूली की योजना कई बार बनी लेकिन हर बार वह फाइलों में ही सीमित रह गई। निगम सदन की कई बैठकों में पार्षद के प्रस्ताव पर कछार में बने मकानों से टैक्स वसूली की अनुमति दी जा चुकी है।
इस बीच राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली रकम में 60 फीसदी की कटौती के बाद आर्थिक संकट झेल रहे नगर निगम ने अब अपनी आय बढ़ाने के लिए कछार में बने मकानों को भी टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी की है। नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि नए वित्तीय वर्ष में इन मकानों का सर्वे शुरू कराया जाएगा। इसके बाद टैक्स का निर्धारण कर वसूली की जाएगी।