सिपाही सूर्यमणि मिश्र हत्याकांड में विधायक विजय मिश्र की पत्नी रामलली मिश्रा को मुक दमे के विचारण के लिए तलब नहीं करने के निचली अदालत के निर्णय को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत को आदेश दिया है कि वह वादी मुकदमा की अर्जी पर दोबारा सुनवाई कर आदेश पारित करे।
यह आदेश न्यायमूर्ति केजे ठाकर ने वादी मुकदमा के द्वारा दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर दिया है। याचिका में कहा गया है कि सूर्यमणि हत्याकांड में विधायक विजय मिश्र, उनकी पत्नी रामलली मिश्र समेत दस को नामजद किया गया था। पुलिस ने विवेचना के दौरान रामलली का नाम एफआईआर से निकाल दिया। मुकदमे का ट्रायल वाराणसी की अदालत में चल रहा है। वादी ने सीआरपीसी की धारा 319 के तहत कोर्ट में अर्जी देकर रामलली मिश्र को विचारण के लिए तलब किए जाने की मांग की थी। मगर निचली अदालत ने अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी कि सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे के शीघ्र निस्तारण का आदेश दिया है।
इसके अलावा कोई और ठोस कारण अर्जी करने का नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा है कि जब रामलली मिश्र का नाम प्राथमिकी में दर्ज था और बयान में भी सामने आया है तो निचली अदालत को तलब करने पर विचार करना चाहिए था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत को आदेश दिया है कि वादी के 319 के प्रार्थना पर फिर से सुनवाई कर आदेश पारित करें। उल्लेखनीय है कि 12 मई 2003 को इलाहाबाद के सिविल लाइंस में पुलिस सिपाही सूर्यमणि मिश्र की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक सिपाही सूर्यमणि मिश्र पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के भाई की हत्या के मामले की पैरवी कर रहा था।