कोखराज-हंडिया हाईवे पर बृहस्पतिवार सुबह नील गाय से टकराकर बेकाबू कार पलट गई। कार अनियंत्रित होकर हाईवे के नीचे लुढ़कते हुए आ गई। हादसे में दो दोस्तों की मौत हो गई जबकि दो गंभीर रूप हैं। खबर पाकर नवाबगंज पुलिस मौके पर पहुंची। कार में फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला और अस्पताल ले गई। घायलों से पूछताछ के बाद पुलिस ने अनहोनी की खबर मृतकों के घर दी तो कोहराम मच गया। कार सवार युवक कानपुर से वाराणसी दर्शन करने जा रहे थे।
कानपुर नगर के गोविंदनगर कच्ची बस्ती गजौली का रहने वाला कृष्ण गोपाल गुप्ता(25) पुत्र रामगिरीश गुप्ता एक प्राइवेट नौकरी करता था। उसका दोस्त मयंक वर्मा (26) पुत्र शैलेंद्र वर्मा निवासी बर्रा कानपुर भी प्राइवेट नौकरी करता था। बृहस्पतिवार भोर में कृष्ण गोपाल और मयंक वर्मा अपने दो अन्य दोस्तों दीपू (22) और विनय(24) के साथ मारुति जेन कार में कानपुर से वाराणसी दर्शन करने के लिए निकले। हाईवे पर मेण्डारा गांव के पास सामने से भागते हुए निकली नील गाय को देखकर कार चालक हड़बड़ा गया। नील गाय को बचाने के चक्कर में कार अनियंत्रित हो गई। बेकाबू कार पलटते हुए हाईवे के नीचे आ गई।
हादसे के बाद आसपास के लोग भागकर पहुंचे। सुबह साढ़े छह बजे दुर्घटना होने के चलते हाईवे पर टहल रहे लोगों ने कार में खून से लथपथ युवकों को बाहर निकाला। कृष्ण गोपाल और मयंक वर्मा की सांस थम चुकी थी। जबकि दीपू उर्फ दीपक और विनय की हालत नाजुक थी। घटना की जानकारी पाकर नवाबगंज पुलिस पहुंची। घायलों को एसआरएन अस्पताल पहुंचाया। हादसे की खबर मृतकों के घर पहुंची तो रोते बिलखते परिजन कानपुर से दोपहर बाद अस्पताल पहुंचे। परिवारीजनों के मुताबिक कृष्ण गोपाल दो भाइयों में छोटा था और उसके पिता की कानपुर में मिठाई की दुकान है।
अनहोनी की खबर पाकर पहुंची मां संगीता और पिता रामगिरीश का रोकर बुरा हाल था। जबकि मयंक वर्मा तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। कृष्ण गोपाल के साथ ही नौकरी करता था। जिसके चलते दोनों अच्छे दोस्त थे। उसकी मौत से घर में कोहराम मचा है। मां पुष्पा वर्मा और शैलेंद्र की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे। घायल विनय और दीपक के परिजन उन्हें एसआरएन अस्पताल से कानपुर लेकर चले गए।
हाईवे पर आमतौर पर लोग तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं। ऐसे में कभी अचानक नील गाय, भैंस, कुत्ता जैसा कोई जानवर सामने आ जाए तो हादसा तय होता है। तेज रफ्तार में ड्राइवर सामने आए जानवर को बचाने के लिए गाड़ी मोड़ते हैं तो गाड़ी बेकाबू होकर पलट जाती है या दूसरे वाहन से टकरा जाती है। ऐसी घटना में जान माल का नुकसान होता है। लोगों का कहना कहना है कि हाईवे के दोनों ओर जाल लगाया जाए। ताकि कोई जानवर या व्यक्ति गलत ढंग से हाईवे पर न आ सके। मगर हंडिया-कोखराज बाईपास हो या जीटी रोड कहीं भी सुरक्षा के लिए जाली नहीं लगी है।
एसपी ट्रैफिक निहारिका शर्मा की सलाह है कि हाईवे हो या कोई और सड़क गाड़ी इतनी रफ्तार में चलाए कि अचानक सामने कोई जानवर या गाड़ी आ तो हादसे का खतरा न रहे। ट्रैफिक एक्सपर्ट कहते हैं कि कभी ऐसी भयावह स्थिति आ जाए तो खुद की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्रेक मारकर वाहन रोकना चाहिए। अगर सामने जानवर आ जाए और गाड़ी की रफ्तार तेज हो तो ब्रेक लगाकर टक्कर टालने की कोशिश तो करें। मगर गाड़ी को ऐसे भी न मोड़िए कि पलट जाए या किसी और वाहन से भिड़ंत हो जाए।