सिविल लाइंस स्थित एक्सिस बैंक में एक शिक्षण संस्थान के 22.39 करोड़ के गबन के आरोप में पुलिस ने बैंक के कस्टमर केयर ऑफीसर कमाल अहसान को इलाहाबाद में बैंक रोड से गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कमाल भोपाल भाग गया था, तब से वहीं था। इस दौरान कई बार सिम और मोबाइल नंबर बदलकर परिजनों से बात करता रहा। इसी सप्ताह घरवालों से मिलने करैली लौटा था। भनक लगते ही पुलिस ने क्राइम ब्रांच की मदद से उसे दबोच लिया। शिक्षण संस्था के एकाउंटेंट राजेश कुमार की गिरफ्तार को भी दबिश दी गई।
इसी साल अप्रैल में एक्सिस बैंक की सिविल लाइंस शाखा में 22.39 करोड़ के गबन का खुलासा अमर उजाला ने किया था। उसी के बाद शाखा प्रबंधक ने 2013 से 2016 के दौरान शिक्षण संस्थान के खाते से 22.39 करोड़ रुपये निकालने की रिपोर्ट थाना सिविल लाइंस में दर्ज कराई थी। जिसमें बैंक अधिकारी कमाल अहसान और शिक्षण संस्था के एकाउंटेंट राजेश कुमार को नामजद किया गया। उसी के बाद से दोनों फरार हो गए थे। एकाउंटेंट ने विभिन्न तारीखों में बैंक अधिकारी की मदद से एक सौ से अधिक चेक नंबरों का हवाला देकर कैश निकाला था।
शुरू में इसकी जांच एसओ सिविल लाइंस ने खुद की। कोई प्रगति न हुई तो बैंक निदेशक मंडल ने सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट इलाहाबाद में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में एसएसपी से आठ अगस्त तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश किए हैं। इसी बीच एसएसपी ने विवेचना सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्रा को सौंपी। उनकी मदद के लिए क्राइम ब्रांच को लगा दिया गया था। सीओ और क्राइम ब्रांच के संयुक्त प्रयास से शुक्रवार को नामजद आरोपी बैंक अधिकारी कमाल अहसान को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में सीओ ने बैंक और शिक्षण संस्था से अभिलेख मांगे हैं।
गिरफ्तार कमाल अहसान ने स्वीकार किया है कि 2013 से लेकर अक्तूबर 2015 तक उसने बिना चेक के ही काफी रकम निकालकर शिक्षण संस्थान के लेखाकार और उसके मित्र व परिजनों के खातों में हस्तांतरित की थी। जिसकी एवज में 10 से लेकर 20 फीसदी कमीशन मिलता था। 10 लाख तक के चेक पर 10 फीसदी और उससे अधिक राशि के चेक पर 20 फीसदी कमीशन की व्यवस्था थी। अक्तूबर 2015 में उसका तेलियरगंज शाखा में तबादला हो गया था। उसके बाद दूसरे कस्टमर केयर आफीसर को भी उसी हिसाब से भुगतान होता रहा।
कमाल का कहना है कि कमीशन में मिले पैसे से 40 लाख की ओडी और 20 लाख की हो़ंडा सिटी कार तथा साढ़े चार लाख रुपये की हार्ले डेविडसन बाइक खरीदी थी। इसी राशि से करेली में दो आलीशान मकान भी खरीदे। यह सब दो साल में हो गया था। लग्जरी गाड़ियों से ही वह घर से बैंक आया करता था। उसके ऐशोआराम देख बैंक अफसरों और पड़ोसियों को शक हुआ। इसके बाद शिकायत हुई। स्थानीय लोगों और बैंक स्टाफ की ओर से की गईं शिकायतों पर गलत तरीके से भुगतान करने का खुलासा हुआ था।
पुलिस जांच में बैंक के 67 अफसर और आ़िडटर निशाने पर हैं। जल्दी ही इन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। फिलहाल बैंक से धन निकासी का सिस्टम पता करने के लिए सीओ कर्नलगंज ने शाखा प्रबंधक को तलब किया है। उनसे बैंकिंग नियम का पूरा ब्योरा मांगा है। साथ में उन दिनों तैनात पटलवार कर्मियों तथा जांच को आने वाले आडिटरों के नाम भी मांगे गए हैं। 22. 39 करोड़ रुपये के गबन से प्रभावित शिक्षण संस्था के प्रबंध तंत्र को भी जांच में सहयोग के लिए तलब किया गया है।
आरबीआई नियमों के अनुसार 10 लाख तक के सामान्य चेक को प्रस्तुतीकरण से लेकर कैश देने या फिर दूसरे खातों में धनराशि हस्तांतरण तक तीन बैंक कर्मी जिम्मेदार होते हैं। 10 लाख से अधिक राशि के चेक से निकासी के लिए बैंक प्रबंधक तक जिम्मेदार हैं। इसके अलावा हर छह महीने पर आडिट का प्रावधान है। आडिट के लिए टीमें आती रहीं लेकिन उन्होंने इस गबन का खुलासा करने के स्थान पर पर्दा डाले रखा था। अप्रैल 2013 से लेकर जून 2016 तक हुए इस गबन के लिए बैंक के 67 अफसर और आडिटर भी दोषी हैं। इन सभी बयान के लिए सीओ के स्तर से तलब करने की तैयारी कर ली है।
बैंक के निदेशक मंडल के मुंबई कार्यालय को भेजी गई बेनामी चिट्ठी ने इस गबन का खुलासा किया था। इस शिकायती चिट्ठी की जांच के लिए मुंबई से पांच सदस्यीय अधिकारियों की टीम आई थी। उसने बैंक का रिकार्ड देखा तो पैरों तले जमीन खिसक गई थी। प्रबंधक को जानकारी दी गई और 12 कर्मचारियों की तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी गई थी।
‘बैंक में 22.39 करोड़ के गबन की जांच के लिए बैंक और शिक्षण संस्था के स्टाफ को तलब किया है। जांच की रिपोर्ट हाईकोर्ट ने आठ अगस्त तक मांगी है, इसीलिए पुलिस लाइन स्थित कार्यालय में इस प्रकरण की प्रतिदिन समीक्षा होगी।’ आलोक मिश्रा, सीओ कर्नलगंज