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पिता की बेइज्जती का बदला लेने के लिए अतुल ने दी थी 70 हजार की सुपारी

Sat, 18 Nov 2017 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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गिरफ्तार - फोटो : FILE PHOTO
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चौफटका इलाके में गुरुवार की दोपहर आबकारी इंस्पेक्टर इंद्रजीत गर्ग और सिपाही शशांक सिंह को गोली मारने के मामले में क्राइम ब्रांच और धूमनगंज पुलिस ने दो शूटरों को गिरफ्तार कर लिया। हमला आबकारी विभाग के ही निलंबित सिपाही के बेटे अतुल ने सुपारी देकर करवाया था। उसे भी पकड़ लिया गया है। पहले इसमें निलंबित सिपाही के दूसरे बेटे राहुल का नाम सामने आया था, मगर विवेचना में उसकी कोई भूमिका नहीं दिखी। पुलिस इसकी जांच कर रही है।
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क्राइम ब्रांच और धूमनगंज पुलिस ने आबकारी विभाग के निरीक्षक इंद्रजीत गर्ग और सिपाही शशांक सिंह से पूछताछ के बाद विभाग के निलंबित सिपाही अनिल सिंह के बेटे अतुल सिंह को पकड़ा। उससे जब कड़ाई से पूछताछ हुई तो मामले का खुलासा हो गया। इंस्पेक्टर धूमनगंज नागेश सिंह ने बताया कि मामला करेली में शराब की एक दुकान से जुड़ा हुआ है। दरअसल, पिछले एक साल से निलंबित सिपाही अनिल सिंह किसी दूसरे के नाम से शराब की दुकान चला रहा है। कुछ समय पहले इंस्पेक्टर इंद्रजीत गर्ग और उनकी टीम दुकान पर ओवररेटिंग की शिकायत की जांच करने गई थी, वहीं पर उनकी अनिल से तकरार हो गई। बात बढ़ी तो आबकारी के सिपाहियों ने अनिल की पिटाई कर दी थी। इसी बात से नाराज अनिल के बेटे अतुल ने धूमनगंज क्षेत्र में रहने वाले शूटर बट्टू पाल और सूरज से संपर्क कर 70 हजार की सुपारी दी।

दोनों ने इंस्पेक्टर इंद्रजीत गर्ग की दिनचर्या की रेकी की। इसके बाद उनके पीछे लग गए। गुरुवार को इंद्रजीत और सिपाही शशांक सिंह मुंडेरा स्थित देसी शराब के गोदाम की चेकिंग करने निकले थे। चौफटका के पास बट्टू पाल और सूरज ने उनकी बाइक ओवरटेक की और इंद्रजीत व शशांक को गोली मार दी। शशांक की पीठ से गोली छाती चीरते हुए निकल गई। इंद्रजीत के हाथ में गोली लगी थी। इसके बाद हमलावर भाग निकले थे। पुलिस की तफ्तीश में पता चला है कि बट्टू पाल शूटर रीतेश का भाई है। रीतेश पर कालिंदीपुरम में प्रापर्टी डीलर के घर लूट का आरोप है। वह भी गिरफ्तार हो चुका है।
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इंस्पेक्टर इंद्रजीत गर्ग ने बताया कि 23 जून को हुई घटना की जांच जिला आबकारी अधिकारी बलिया कर रहे हैं। जांच शुरू होते ही अनिल ने उनके और उनकी टीम के लोगों के ऊपर बयान बदलने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था हालांकि कोई भी इस बात के लिए राजी नहीं हुआ। वह इस बात की भी खुन्नस रखता था।
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