बेली अस्पताल में अधीक्षक पर हमला, हंगामा और मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। डॉक्टर और वकील एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए आमने-सामने हो गए हैं। डॉक्टरों की शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर दर्ज की गई एफआईआर में दो वकीलों को नामजद किया गया था। वहीं शुक्रवार को एसएसपी के निर्देश पर कैंट पुलिस ने वकीलों की तहरीर पर अधीक्षक, पीएमएस संघ के सचिव के अलावा दस अज्ञात लोगों के खिलाफ क्रास केस दर्ज कराया है। पीएमएस संघ ने आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर नाराजगी जताते हुए शनिवार को बैठक बुलाई है। बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बृहस्पतिवार को पीएमएस संघ के सचिव डॉ. पद्माकर सिंह बेली अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरएस ठाकुर और अन्य चिकित्सकों के साथ जिलाधिकारी सुहास एल वाई से मिले थे। डॉक्टरों का आरोप था कि फर्जी मेडिकल लीगल रिपोर्ट न बनाने पर हमलावरों ने तोड़फोड़ और अधीक्षक के साथ मारपीट की। डॉक्टर ठाकुर को दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया। पुलिस ने देर रात मामला दर्ज कर लिया था।
शुक्रवार की सुबह बड़ी संख्या में जुटे वकीलों ने एसएसपी से मुलाकात कर कैंट पुलिस पर एक पक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाया। उनकी शिकायत पुलिस ने सुनी ही नहीं। इस पर एसएसपी ने कैंट एसओ को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने शुक्रवार को अधिवक्ता प्रभात कुमार मिश्रा निवासी कटनई बहरिया की तहरीर पर पीएमएस संघ के अध्यक्ष डॉ. पद्माकर सिंह, बेली अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरएस ठाकुर के साथ दस अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। गवाह के तौर पर अधिवक्ता सुधाकर मिश्रा का नाम डाला गया है। वकीलों ने आरोप लगाया कि मेडिको लीगल करने के लिए डॉक्टरों ने पैसे मांगे और न देने पर मारपीट कर नौ हजार रुपये छीन लिए। साथ गए साथी वकील की बाइक भी तोड़ दी।
इस मामले में पुलिस ने खुद को बचाने के लिए दोनों तरफ से एफआईआर दर्ज कर खुद को किनारे कर लिया है। अब दोनों पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं पीएमएस संघ के सचिव डॉ. पद्माकर सिंह ने शनिवार को बैठक बुलाई है। बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि निर्णय इस तरह का होगा कि किसी भी मरीज को दिक्कत न हो।