वेतन भी छीन लेता था राघव
कुछ दिन बाद दोनो फिर से दिल्ली चले गए। पीड़िता के अनुसार इस दौरान उसने प्राइवेट नौकरी भी की, उसे मिलने वाली वेतन राघव जबरदस्ती छीनने लगा। इसके बाद तंग आई पीड़िता ने आगरा के एडीजीपी से संपर्क कर महिला थाने में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना कर राघव के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं ने आरोप पत्र आगरा के ट्रायल कोर्ट ने दाखिल कर दिया। इसके खिलाफ राघव ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राघव के वकील ने दलील दी कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध सहमति से बने थे।
कोर्ट ने कहा...
कोर्ट ने राघव की दलील सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि भले ही वर्षो तक पीड़िता संग सहमति से शारीरिक संबंध बने हो, लेकिन पहली बार नशे की हालत में बनाया गया। उसके बाद खुद की कनपटी पर बंदूक रख कर डरा कर शादी की सहमति ली गई। इससे सिद्ध होता है कि बनाया गया शारीरिक संबंध डरा और भ्रम में डाल कर ली गई सहमति के आधार पर बनाया गया। इसे स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता। लिहाजा, प्रथम दृष्टया मामला दुष्कर्म का है।