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माघ मेला : गो-संसद में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने का प्रस्ताव पारित, हत्या पर मिले मृत्युदंड

Wed, 07 Feb 2024 11:44 AM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

माघ मेले में आयोजित गो संसद में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने का प्रस्ताव पास किया गया। साथ ही गो वध करने पर मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया है। इस प्रस्ताव का चारों पीठ के शंकराचार्यों के साथ ही मौजूद संतों और संन्यासियों ने समर्थन किया। 
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गो संसद में मौजूद चारों पीठ के शंकराचार्य। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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माघ मेला में मंगलवार को पहली बार हुई गो संसद में चारों पीठों के शंकराचार्यों की सहमति से गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए ध्वनि मत से प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान गो -संसद में लिए गए निर्णयों के आधार पर 21 सूत्रीय घोषणा पत्र जारी किया गया। इसमें गो हत्या पर मृत्युदंड का प्रावधान लाने,गाय को पशुओं की सूची से अलग कर गो मंत्रालय का गठन करने और स्कूलों में मिड-डे मील में पुष्टाहार की जगह बच्चों को गाय का दूध पिलाने की बात प्रमुखता से शामिल है। इस प्रस्ताव की प्रति बुधवार को केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

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सेक्टर तीन स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के शिविर में गो संसद मंगलवार को दिन के 12 बजे आरंभ हुई। ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर स्वामी सदानंद महाराज की मौजूदगी में सबसे पहले एजेंडा पढ़कर सुनाया गया। इसके बाद शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य भारती तीर्थ की ओर से भेजा गया वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। इसमें शृंगेरी के शंकराचार्य की ओर से कहा गया कि गाय भारतीय संस्कृति की चेतना में प्रवाहमान है। इसे राष्ट्रमाता घोषित कर संस्कृति की मूल आत्मा की रक्षा की जानी चाहिए।

माघ मेले में आयोजित गो संसद में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला

गाय भारतीय संस्कृति का प्राण
 

इसी तरह पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की ओर से भेजा गया समर्थन पत्र पढ़ा गया। इसमें उन्होंने गाय को भारतीय संस्कृति का प्राण बताया है। इस गो संसद में शैव, शाक्त, वैष्णव, वैरागी और संन्यासी समेत कई पंथों और संप्रदायों के पांच हजार से अधिक संत और गो भक्तों ने गो माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई। कहा गया कि गो माता को संविधान की राज्य सूची से हटाकर केंद्र सूची में शामिल किया जाना चाहिए।

इस मौके पर शृंगेरी मठ शंकराचार्य के प्रतिनिधि सुंदरम महाराज,हर्षानंद महाराज, गोपाल महाराज ,कालिदास महाराज,सूर्याचार्य महाराज, गोबर गोपाल महाराज, अयोध्या से परमहंसाचार्य महाराज, गुजरात से अवधूत रामायणी, हरियाणा से ब्रह्मानंद ,आचार्य योगेंद्र महाराज,राजस्थान से निर्मलदास,मध्य प्रदेश से महेंद्र भार्गव, जगदीशानंद, महामंडलेश्वर बालेश्वर दास दिगंबर अखाड़, मानस मंजुल दास,महामंडलेश्वर सहजानंद ने गोमाता के आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया, ताकि उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाया जा सके।

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माघ मेले में आयोजित को संसद में मौजूद शंकराचार्य व अन्य संतगण। - फोटो : अमर उजाला
  1. पारित हुए प्रस्ताव के मुख्य बिंदु

 

  • गोमाता को भारत देश में राष्ट्रमाता का संवैधानिक सम्मान प्रदान किया जाए।
  • गो हत्या पर मृत्युदंड दंड का प्रावधान किया जाए
  • कानूनी तौर पर गोमाता को पशु की श्रेणी से हटाकर माता का सम्मान दिया जाए
  • गो माता को पशु श्रेणी से हटाकर अविलंब गो मंत्रालय का अलग से गठन किया जाए।
  • गोमाता और गोवंश के विषय को संविधान में राज्य सूची से हटाकर केंद्रीय सूची में डाला जाए।
  • गोवध या बूचड़खानों से जुड़े व्यक्तियों, गोमांस का क्रय- विक्रय करने वालों को हिंदू धर्म से बहिष्कृत किया जाए।
  • गो तस्करी या मांस व्यवसाय के लिए चिह्नित लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों में न बुलाया जाए। इनके साथ भोज-भात, वैवाहिक आदि संबंध न करें।
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