माघ मेले में आयोजित गो संसद में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती।
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गाय भारतीय संस्कृति का प्राण
इसी तरह पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की ओर से भेजा गया समर्थन पत्र पढ़ा गया। इसमें उन्होंने गाय को भारतीय संस्कृति का प्राण बताया है। इस गो संसद में शैव, शाक्त, वैष्णव, वैरागी और संन्यासी समेत कई पंथों और संप्रदायों के पांच हजार से अधिक संत और गो भक्तों ने गो माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई। कहा गया कि गो माता को संविधान की राज्य सूची से हटाकर केंद्र सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
इस मौके पर शृंगेरी मठ शंकराचार्य के प्रतिनिधि सुंदरम महाराज,हर्षानंद महाराज, गोपाल महाराज ,कालिदास महाराज,सूर्याचार्य महाराज, गोबर गोपाल महाराज, अयोध्या से परमहंसाचार्य महाराज, गुजरात से अवधूत रामायणी, हरियाणा से ब्रह्मानंद ,आचार्य योगेंद्र महाराज,राजस्थान से निर्मलदास,मध्य प्रदेश से महेंद्र भार्गव, जगदीशानंद, महामंडलेश्वर बालेश्वर दास दिगंबर अखाड़, मानस मंजुल दास,महामंडलेश्वर सहजानंद ने गोमाता के आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया, ताकि उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाया जा सके।
माघ मेले में आयोजित को संसद में मौजूद शंकराचार्य व अन्य संतगण।
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