इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को इस स्पष्टीकरण के साथ 30 सितंबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है कि कमेटी की संस्तुति के बावजूद सीजनल संग्रह अमीनों को नियमित करने की कार्रवाई न कर याची के दावे के अधिकार से वंचित क्यों किया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने भुवनेश्वर प्रसाद तिवारी की याचिका पर दिया है।
सरकारी वकील का कहना है कि 35 फीसदी संग्रह अमीन के पद सीजनल संग्रह अमीनों से भरे जाने का नियम है। प्रयागराज में संग्रह अमीन के 218 पद हैं, जिसमें से 35 फीसदी कोटे में 76 पद होते हैं। वर्तमान में 76 सीजनल संग्रह अमीनों के पद पर 86 सीजनल संग्रह अमीन कार्यरत हैं। याची के अधिवक्ता का कहना है कि 2016 में सीजनल संग्रह अमीनों को नियमित किए जाने का फैसला लिया गया।
2015 की नियमावली के अनुसार संग्रह अमीनों के 85 फीसदी पद सामयिक संग्रह अमीनों से भरे जाने चाहिए। कोर्ट ने पिछले आदेश में प्रथमदृष्ट्या सीजनल संग्रह अमीनों को नियमित न किये जाने को अवैध करार दिया था। 24 मई 2017 को कमेटी की संस्तुति पर जिलाधिकारी द्वारा अमल न करने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। इस पर कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।