डीजीपी मुकुल गोयल से कोर्ट ने इस मामले से जुड़े कई सवाल किए। कोर्ट ने अभियुक्तों का बयान लेकर छोड़ देने और उनकी गिरफ्तारी नहीं करने को गंभीरता से लिया। सुनवाई की शुरुआत में छात्रा की फांसी के बाद हुए शव के पंचनामे की वीडियो रिकार्डिंग देखने के बाद कोर्ट ने डीजीपी से पूछा कि किसी के भी खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज होने पर पहला काम क्या करते हैं? डीजीपी ने जवाब दिया कि गिरफ्तारी।
फिर कोर्ट ने पूछा कि इतने गंभीर मामले में पुलिस ने आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? क्या आपने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी है? डीजीपी का जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने कहा कि हम आपको बताते हैं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नाबालिग के कपड़ों पर सीमेन पाया गया है। उसके सिर पर चोट के निशान थे। इसके बाद भी तीन महीने बाद अभियुक्तों का केवल बयान ही लिया गया, ऐसा क्यों? इस पर डीजीपी मुकुल गोयल ने कहा कि फिर से एसआईटी गठित कर देते हैं।
तीन साल पूर्व गठित एसआईटी ने क्या किया
डीजीपी मुकुल गोयल के इस जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि तीन साल पूर्व गठित एसआईटी ने क्या किया? अब एक और एसआईटी के गठन से क्या होगा? किस पर विश्वास किया जाए? कोर्ट ने पूछा, आपने तीन साल में किसके खिलाफ कार्रवाई की। कोर्ट ने यह भी कहा, हमें खुद बताना पड़ रहा है कि इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है। रिकॉर्ड अच्छी तरह से देख लीजिए और पूरा मामला समझ लीजिए।
इसके बाद कल सुबह 10 बजे पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हों। पिछली सुनवाई पर एसआईटी ने कोर्ट को बताया था कि घटना की एफआईआर तो दर्ज कर ली गई थी लेकिन आरोपी से पूछताछ उचित समय के भीतर नहीं की गई। आरोपी से पूछताछ घटना के तीन माह बाद की गई।
कोर्ट में मौजूद जांच अधिकारी आरोपी से पूछताछ में हुई देरी के बारे में कुछ नहीं बता सके थे। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह अंतराल आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोपों के बावजूद हुआ, जो गंभीर चूक है। इसके बाद कोर्ट ने डीजीपी को आज तलब किया था। हालांकि उस दिन कोर्ट को यह भी बताया गया था कि मामले में 12 लोगों का नार्को टेस्ट हुआ लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। डेढ़ सौ लोगों के स्पर्म टेस्ट हुए लेकिन कोई मैच नहीं हुआ। 500 लोगों के कॉल डिटेल ट्रेस हुए, वह भी बेकार गया।