चार साल पहले जमीन को लेकर हुआ था समझौता
झूंसी के उस्तापुर-महमूदाबाद गांव में तकरीबन चार करोड़ रुपये की जिस जमीन को लेकर विवाद की बात सामने आई है, उसका निपटारा चार साल पहले हुआ था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में विवाद हुआ लेकिन फिर सभी पक्षों में समझौता हो गया था। प्रारंभिक जांच पड़ताल में यही बात सामने आई है कि इसके बाद जमीन को लेकर कोई विवाद सामने नहीं आया। न ही इस मामले में किसी तरह की शिकायत थाने पहुंची।
घर से सत्यपाल के पीछे लग गया था हत्यारोपी
नैका गांव के सत्यपाल भारतीया के पीछे हत्यारोपी शिवकुमार घर से ही पीछे लग गया था। छतनाग रोड पर जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से पुलिस को इस बात की जानकारी मिली है। इससे साफ है कि वह योजना बनाकर आया था। हालांकि, एक खास बात यह है कि सीसीटीवी फुटेज में वह अकेले ही बाइक से जाता दिखा है।
तीन टीमें लगाई गईं
झूंसी पुलिस व एसओजी के साथ कुल तीन टीमें हत्यारोपी की तलाश में लगाई गई हैं। उसका नंबर भी सर्विलांस पर लगाया गया है। पुलिस उसके रिश्तेदारों के साथ ही हर संभव ठिकानों पर देर रात तक छापा मारती रही। उसके कुछ करीबियों को भी पूछताछ के लिए थाने लाया गया है। देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया था।
नामजद सिपाही का जमीन के मामलों में है दखल
ठेकेदार हत्याकांड में नामजद सिपाही के झूंसी में जमीन के कई मामलों में दखल की बात सामने आई है। उसकी तैनाती लखनऊ में है, लेकिन झूंसी में पूर्व में भी विवादों में उसका नाम आ चुका है। इससे पूर्व पैराकमांडो व एक अन्य पक्ष के बीच हुई गोलीबारी में भी उसका नाम सामने आया था। सूत्रों का कहना है कि सिपाही अपने कुछ करीबियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से जमीन की खरीद-फरोख्त के धंधे में भी लिप्त है।
जमीन को लेकर विवाद की बात सामने आई है लेकिन अन्य बिंदुओं पर भी जांच चल रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - आस्था जायसवाल, एसीपी झूंसी