यह आदेश न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना शर्मा ने मनोरमा सिंह की याचिका पर दिया है। याची ने चार लोगों के खिलाफ छेड़छाड़ करने व धमकाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। कहा था कि आरोपी ने डेढ़ लाख रुपये नौकरी दिलाने के बहाने लिए थे। पीड़िता का अदालत में दो बार बयान दर्ज किया गया। उसने मजिस्ट्रेट पर गलत बयान दर्ज करने का आरोप लगाया।
इसके बाद उसने फिर से यही आरोप लगाया और हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया। जब बिना उचित कारण तीसरी बार बयान दर्ज करने की अर्जी दी गई तो मजिस्ट्रेट ने अर्जी खारिज कर दी, जिसे चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा ट्रायल के समय याची अपना पक्ष रख सकती है। उसी समय इसपर विचार होगा।