याची अधिवक्ता की दलीलें खारिज
याची अधिवक्ता ने दलील दी गई कि उसने दूसरी पत्नी का नाम सेवा रिकॉर्ड में नॉमिनी के तौर पर दर्ज कराया था। इसे विभाग को सूचना देने के रूप में माना जाना चाहिए। यह भी कहा गया कि दूसरी शादी का आरोप साबित होने की स्थिति में भी बर्खास्तगी के बजाय मामूली सजा दी जानी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सीआरपीएफ नियम 15 के तहत पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने पर रोक है। व्यक्तिगत कानून में दूसरी शादी की अनुमति होने की स्थिति में भी विभाग की पूर्व अनुमति जरूरी है। कोर्ट ने पाया कि पहली शादी कायम रहते बिना तलाक दूसरी शादी की गई है। कोर्ट के अनुसार, इससे सीआरपीएफ नियम 15 और केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों के नियम 21 का उल्लंघन हुआ। कोर्ट ने कहा कि याची की ओर से की गई दूसरी शादी सीआरपीएफ नियमों के तहत कदाचार है और बर्खास्तगी की सजा वैध है।