बीते तीन वर्षों से मानसून का मिजाज देख रहे हैं। दिन में निकल रही धूप को देखकर एक बार फिर ऐसी आशंका गहराने लगी है कि कहीं इस बार भी बादल दगा न दे जाएं। बारिश के आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं। उधर, मानसून को बनाए रखने के लिए वन विभाग ने जो पौधरोपण कराए वे अपना आकार नहीं ले पाए। जो पौधे खड़े थे, वे लगातार गिरते जा रहे हैं। इसी के चलते इलाहाबाद ही नहीं उसके आसपास के जिले बारिश के लिहाज से संवेदनशील बनते जा रहे हैं। पर्यावरण विज्ञानी कह रहे हैं कि पेड़ों के कटने से गर्मी ज्यादा असर कर रही है। इसके चलते बादल टिक नहीं पा रहे हैं और वे भटक कर दूसरे इलाकों में बारिश कर रहे हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक तीन सालों में 2013 में 858 एमएम, 2014 में 756.9 एमएम और 2015 में मात्र 414 एमएम बारिश हुई है। इसमें से जून से सितंबर माह में जो कि बारिश का मुख्य मौसम होता है, 2015 में 750.69 एमएम, 2014 में 500 एमएम और 2015 में 243 एमएम ही बारिश हुई। इसका असर न केवल खेती पर पड़ा बल्कि धरती भी प्यासी ही रह गई है। बारिश कम होने के कई सारे साइडइफेक्ट सामने आ रहे हैं। शियाट्स के पर्यावरण विज्ञानी डॉ.विश्वरूप मेहरा कहते हैं, बारिश कम होने की मुख्य वजह पेड़ों की कमी है। पेड़ों के न होने से बादलों को बारिश करने के अनुकूल तापमान नहीं मिल पाता है। गर्मी अधिक होने से बादल बिखर जाते हैं और उन इलाकों में जाकर बारिश करते हैं जहां पेड़ होते हैं। हिमालयी बेल्ट में बारिश होने का मुख्य कारण यही है।
इलाहाबाद और इसके आसपास ही नहीं पूरे यूपी में पेड़ों की संख्या कम है। धरातलीय इलाकों में 33 फीसदी इलाके में जंगल होने चाहिए लेकिन यहां तो नौ फीसदी इलाके में ही जंगल है। वन विभाग पेड़ों की संख्या को बढ़ाने के लिए हर वर्ष पौधरोपण करा रहा है लेकिन वे तैयार नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में न केवल वन विभाग बल्कि सभी लोगों को पौधरोपण करने की जरूरत है।
जंगलों का क्षेत्र कम होने से बारिश भी लगातार कम होती जा रही है। वर्ष 2003 तक इलाहाबाद ही नहीं यूपी में औसत बारिश 11.5 एमएम हुआ करती थी लेकिन उसमें लगातार कमी आती गई जिसके चलते औसत बारिश का रिकार्ड बदल गया। अब 950 एमएम बारिश को औसत बारिश माना जा रहा है। तीन सालों में तो मानसून ने इसमें भी कमी कर दी और बारिश औसत से भी कम हुई।
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तीन सालों में इलाहाबाद मंडल में लगाए गए पौधे
वर्ष - एरिया (हेक्टेयर में)- पौधों की संख्या
2015-16 - 1903.78 - 1484827
2014-15 - 2000.46 - 1369165
2013-14 - 21890 - 1717227