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कांग्रेस ने एक तीर से साधे कई निशाने

Fri, 15 Jul 2016 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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कांग्रेस - फोटो : file photo
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यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने एक तीर से कई निशान साधे हैं। कई दशकों से हाशिये पर चल रहे क्षत्रियों, ब्राह्मणों समेत सवर्णों को साधने के लिए कांग्रेस ने संजय सिंह और शीला दीक्षित को आगे किया तो पिछ़डों पर डोरे डाल रही भाजपा एवं सपा से टक्कर लेने के लिए राज बब्बर को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी। कांग्रेस ने मुस्लिमों को साधने की भी पूरी कोशिश की और प्रदेश का प्रभार गुलाम नबी आजाद को सौंप दिया।
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राज बब्बर को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर न सिर्फ कांग्रेस ने पिछड़ा कार्ड खेला, बल्कि पार्टी राज बब्बर के ग्लैमर को भी भुनाने की कोशिश करेगी। प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर पांच साल सपा में भी रहे चुके हैं। पहली बार वह सपा के टिकट पर ही आगरा से सांसद बने और फिर सपा से अलगाव के बाद फिरोजबाद उपचुनाव में मुख्यमंत्री अलिखेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव को पराजित कर सांसद निर्वाचित हुए। सपा के हर कदम से अच्छी तरह वाकिफ राज बब्बर के पुराने अनुभव को कांग्रेस सपा के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करेगी।

जहां तक शीला दीक्षित का सवाल है तो इसमें कोई दो राय नहीं कि उन्हें मुख्यमंत्री का प्रत्याशी घोषित कर कांग्रेस दूर हो चुके ब्राह्मणों को पार्टी से फिर जोड़ना चाहती है। सिर्फ जाति नहीं, विकास के मुद्दे पर भी कांग्रेस शीला का नाम भुनाना चाहती है। जब भी देश की राजधानी दिल्ली के विकास की बात होती है तो शीला दीक्षित के नाम का जिक्र भी जरूर होता है। ऐसे में शीला को यूपी के चुनाव में पहचान का भी कोई संकट नहीं होगा। घोटाले के एक मामले को छोड़ दें तो उन पर भ्रष्टाचार के कोई गंभीर आरोप नहीं है और जो एक मामला है भी तो उसकी जांच चल रही है और आरोप साबित नहीं हुआ है। 
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इसके साथ ही कांग्रेस ने संजय सिंह को उत्तर प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष बनाकर क्षत्रियों को साधने की कोशिश की है। अमेठी और सीधे गांधी परिवार से जुड़े होने के नाते पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। गुलाम नबी आजाद का मुस्लिम समुदाय में मजबूत जनाधार है और यही वजह है कि पार्टी ने उन्हें प्रदेश का प्रभारी बनाया। बीस साल पहले भी कांग्रेस ने उन्हें यूपी का प्रभार दिया था और उस वक्त कांग्रेस का प्रदेश प्रदर्शन मुस्लिम बहुल इलाकों में बेहतर रहा था।
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