अगर लगे कि छात्र या छात्रा ज्यादा बात करने से बच रहे हैं तो उनसे मिलने का प्रयास करें। अवसाद के प्रारंभिक लक्षणों में भूख न लगना, कम हंसना, महफिल में भी रहकर बातचीत में शामिल न होना और उदास रहना आदि शामिल हैं। अगर किसी छात्र में यह सब प्रवृत्ति दिखे तो घर वालों को तुरंत सतर्क होकर ज्यादा समय उसे देना चाहिए। उसे विश्वास दिलाना चाहिए घर वाले हर परिस्थिति में उसके साथ हैं।
वहीं, प्रतियोगी छात्र आम छात्रों की तुलना में बड़ी उम्र के होते हैं, इसलिए उन्हें खुद भी इन लक्षणों के दिखने के बाद सतर्क हो जाना चाहिए। तमाम डिफेंस मेकेनिज्म होते हैं, जिन्हें अपनाना चाहिए।
केस 1- सिद्धार्थ नगर के देवरुआ कला निवासी अक्षय कुमार के बेटे रितुराज वरुण ने एनी बेसेंट स्कूल के पास स्थित लॉज में 24 सितंबर को फांसी लगाकर जान दे दी।
केस 2- गोंडा के तुलकाडीह गांव के अनुराग कुमार ने मालवीय नगर स्थित लॉज में फांसी लगाकर जान दे दी। सुसाइड नोट में लिखा, मैं खुद ही मौत का जिम्मेदार।
केस 3 - एमपी के पन्ना के रहने वाले राज किशोर के दो बेटों में छोटा अभिषेक एमएससी बीएड के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। कर्नलगंज में किराये के कमरे में उसने फांसी लगाकर जान दे दी।