मेजा में बाढ़ से नष्ट हुई फसलों के एवज में किसानों को प्रति हेक्टेयर 17500 रुपये मुआवजा दिए जाएंगे। तहसील प्रशासन का दावा है कि सर्वे कार्य पूर्ण कर जिला प्रशासन को रिपोर्ट दी गई है। उम्मीद है जल्द ही प्रभावित किसानों को मुआवजे की राशि मिल जाएगी।
दो माह पहले बारिश अधिक होने से मेजा तहसील के अमिलिया कला, बरहा, भरूही, भरारी, रामचन्द्रकापूरा, गोसौरा, मरहा सहित कई गांवों में करीब पांच सौ हेक्टेयर धान की फसल डूबकर नष्ट हो गई थी। इसके अलावा गंगा और टोंस में आई बाढ़ से बरसैता, बंधवा, छतवा, बिजौरा, लोहारी, उपरौड़ा, अमिलिया खुर्द में भी कई किसानों की फसल डूबकर पूरी तरह से खराब हो गई थी। प्रशासन ने लेखपालों को लगाकर नष्ट हुई फसलों का सर्वे कराया।
जिसमें ज्यादातर नुकसान बरहा और अमिलिया कला के किसानों का हुआ है। बरहा कला के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमशंकर पटेल ने बताया कि बाढ़ से धान की फसल नष्ट तो हुई है अब गेहूं की खेती करना मुश्किल भरा काम होगा। क्योंकि अब भी बारिश के पानी से खेत डूबे पड़े हैं। मेजा तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो रमाशंकर शुक्ल ने बताया कि सर्वे कार्य पूरा हो गया है। 17500 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से किसानों को मुआवजे की राशि दिए जाने की व्यवस्था तय की गई है। जल्द ही मुआवजे की राशि किसानों को मिलना शुरू हो जाएगा। संवाद
बाढ़ से नष्ट हुई फसलों का बड़ी पारदर्शिता से सर्वे कार्य कराया गया है। राजस्व कर्मियों के साथ कृषि विभाग के कर्मचारियों को भी लगाया गया गया था। मुआवजे की राशि जल्द ही किसानों के बैंक खाते में उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
सुरेंद्र प्रताप यादव उप जिलाधिकारी मेजा।
सर्वे कार्य में लापरवाही का आरोप
किसानों का कहना है कि दो माह बाद भी मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं मिला। बल्कि बाढ़ से फसल नष्ट होने के बाद प्रशासन के साथ सियासी लोगों ने किसानों के जख्मों पर मरहम जरूर लगाया लेकिन आज तक मुआवजे की राशि नहीं मिल सकी है। सोनाई के किसान दिलीप विश्वकर्मा ने बताया कि प्रशासन के लोग सर्वे कार्य में भी लापरवाही बरती है। जिससे कई किसान मुआवजे की राशि पाने से वंचित हो जाएंगे। इसके अलावा किसान आरबी पटेल ने भी प्रशासन पर सर्वे कार्य में लापरवाही का आरोप लगाया है। संवाद
खरीफ के बाद रबी की भी फसल पर मड़रा रहे संकट के बादल
खरीफ की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ ही गई। अब गेहूं की बुवाई नहीं हो पाएगी। अमिलिया कला के नहवाई क्षेत्र और गोसौरा में पानी निकासी की व्यवस्था न होने से दो माह बाद भी बाढ़ के पानी से खेत डूबे पड़े हैं। ऐसे में धान की फसल तो बाढ़ के पानी से नष्ट हो गई अब गेहूं की बुवाई भी नहीं हो पाएगी। किसान परेशान हैं। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। किसान सोवा लाल, पंचू लाल, हिंछलाल बिंद ने बताया कि पानी निकासी के लिए प्रशासन ने किसी प्रकार का इंतजाम नहीं किया। जिससे बारिश का पानी भरा हुआ है।