पिछले तीन दिनों से आसमान में छाए बादलों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनकी खेतों में तैयार धान की हजारों बीघे फसल पर संकट के बादल छाए हैं। मौसम का मिजाज भी घंटे दर घंटे बदलता देख किसान धान को ओसाने और सुखाने में दिन भर खेत में जुटे रहे।
दिन में खिली हल्की धूप ने थोड़ी राहत दी लेकिन शाम को हुई हल्की बूंदाबांदी ने किसानों की धड़कन बढ़ा दी। वह धान की कटी फसल को बचाने का जुगात करते नजर आए।
सोरांव तहसील क्षेत्र में धान की कटाई जोरों पर है। वहीं, फूलपुर, बहरिया, कलंदरपुर, मऊआइमा में भी धान की कटाई की जा रही है। बीते तीन दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। किसानों का कहना है कि अगर बेमौसम बारिश हो गई तो फसल बर्बाद हो जाएगी।
गंगापार के सोरांव तहसील में 60,614 हेक्टेयर भूमि पर खेती की जा रही है। जिसमें सिंचाई योग्य 42,523 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है। पिछले तीन दिन से धूप न निकलने से किसान चिंतित हैं। उनका कहना है कि 20 दिन पहले हुई बारिश से धान खेत में ही गिर गए थे। अगर अब बारिश हुई तो धान एकदम बर्बाद हो जाएगा। साथ ही पुआल भी खराब हो जाएगा। जिस वजह से पशुओं के लिए चारे का संकट आ जाएगा।
मंगलवार को फसल खराब होने के डर से पूरे दिन किसान खेतों में धान की पिटाई करने में लगे रहे। मौसम खराब होने के डर से ही किसानों ने दलहनी-तिलहनी और आलू की बोआई रोक दी है। धान की देर से पकने वाली प्रजातियों को छोड़ दें तो लगभग 80 प्रतिशत फसल खेतों में पककर खड़ी है। वहीं, 20 फीसदी के आसपास किसानों ने धान को काटकर खेत में छोड़ रखा है। तेज बारिश से उनकी फसल बर्बाद हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार तक मौसम खराब रहने की संभावना है।
किसान बोले
धान की फसल इस बार अच्छी हुई थी लेकिन अब सब इंद्रदेव की कृपा पर है। अगर बारिश होती है फसल बर्बाद हो जाएगी।
राजेश कुशवाहा
इलाके के अधिकांश किसानों की फसल तैयार होकर अभी खेतों में खड़ी है। अगर बारिश हुई तो धान के साथ ही पुआल भी खराब हो जाएगा।
राम पूजन
मौसम के बदले मिजाज से किसान चिंतित हैं। उनकी गाढ़ी कमाई खेतों में पड़ी है और वह बादल छंटने के इंतजार में हैं ताकि कटाई कर फसल को सुरक्षित कर सकें।
राहुल सरोज
बेमौसम बारिश हुई तो किसान की फसल बर्बाद हो जाएगी। क्योंकि अभी आधे से अधिक किसानों ने धान की कटाई शुरू नहीं की।
बिंदेश्वरी प्रसाद