पहाड़ों पर बर्फबारी और पछुआ हवा के चलते मैदानी क्षेत्र का मौसम बदल चुका है। पिछले तीन दिनों से सुबह-शाम कोहरा और बादलों की लुकाछिपी से दिन का तापमान भी लुढ़क गया है। जानकारों के अनुसार यह मौसम खेतों में अंकुरित गेहूं के लिए अमृत है, जबकि आलू, सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए चिंता का विषय है।
कोहरे और ओस के कारण खेतों में पर्याप्त नमी है, जो गेहूं की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि विशेषज्ञ रणविजय सिंह बताते हैं कि जिन खेतों में हाल ही में बोआई हुई थी, वहां गेहूं का जमाव बहुत अच्छा है। कोहरे से गेहूं के पौधों में कल्ले फूटने की प्रक्रिया तेज हो गई है। वहीं आसमान में लगातार कोहरा छाया रहा और धूप नहीं निकली तो आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग लग सकता है। इसमें पत्तियां झुलसकर काली पड़ जाती हैं।
कृषि विशेषज्ञ हिमांशु द्विवेदी ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं में अभी यूरिया का छिड़काव न करें, ओस सूखने का इंतजार करें। मौसम साफ होते ही आलू में मैंकोजेब का छिड़काव करें। सरसों में माहू कीट दिखने पर नीम के तेल या इमिडाक्लोप्रिड का घोल बनाकर छिड़कें।
गेहूं की फसल अभी अंकुरित हो रही है। कोहरा फसल के लिए टॉनिक का काम कर रहा है। हमें अभी सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ रही क्योंकि ओस से ही खेत गीला है।- शिवमूरत सरोज, किसान, मलंग की तकिया
झूंसी तो ठीक है पर कोहरा आलू के लिए नुकसानदायक है। कोहरे से पत्तियां सड़ने का डर है। सरसों में भी फूल आ रहे हैं। इसे धूप की जरूरत है। - एजाज उल्ला फारूकी, किसान, निन्दूरा
टमाटर पकने की बजाय खेत में ही हरे हैं। गोभी के फूल का आकार भी नहीं बढ़ रहा है। कोहरे की वजह से मंडी ले जाने में भी दिक्कत है।- बैजनाथ पटेल, किसान, लालगोपालगंज
लालगोपालगंज- शिवमुरत सरोज- फोटो : 1
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