इस दौरान प्रभारी निरीक्षक, पीएस-हाईवे मथुरा से प्राप्त निर्देशों को शासकीय अधिवक्ता उमेश चंद्र त्रिपाठी ने कोर्ट में रिकॉर्ड पर रखा। इसके अनुसार पर्याप्त पुलिस बल की कमी और कोर्ट रिसीवर की चूक की वजह से सरफेसी अधिनियम- 2002 की धारा 14 के तहत पारित आदेशों के पालन में देरी हो रही है।
वहीं, कोर्ट ने पाया कि सीजेएम मथुरा ने निजी अधिवक्ताओं को कोर्ट रिसीवर के रूप में नियुक्त किया है। इनमें दिल्ली के एक निजी वकील को भी कोर्ट रिसीवर के रूप में नियुक्त किया गया। कोर्ट रिसीवर आदेशों के निष्पादन के लिए अलग-अलग तारीखें तय कर रहे हैं। इसपर कोर्ट ने मथुरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्सव गौरव राज से एक सप्ताह के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। 23 मई 24 को सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित की है।