इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना पासपोर्ट वीजा के नेपाल के रास्ते अवैध रूप भारत में घुसे चीनी नागरिक को शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। पकड़े गए चीनी नागरिक ली जिकुन की कड़ी शर्तों के साथ जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति रामकृष्ण गौतम ने दिया है।
कोर्ट ने कहा कि महाराजगंज के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए याची को पासपोर्ट वीजा अवधि बढ़ाने की अर्जी देने और वीजा पासपोर्ट मिलने के बाद रिहा किया जाए। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट के लिए याची की पेशी जरूरी हो तो जेल अधीक्षक उसे संबंधित अधिकारियों के सामने पेश करें। कोर्ट ने कहा कि सीजेएम महाराजगंज पासपोर्ट वीजा जमा कराकर संतोषजनक प्रतिभूति लेकर रिहाई का आदेश दें। हाईकोर्ट ने यह भी शर्त लगाई है कि बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति वह क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं जाएगा। साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। दूसरा अपराध नहीं करेगा। गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा। कोर्ट में बुलाए जाने पर पेश होगा। इन शर्तों के उल्लंघन करने पर अधीनस्थ अदालत को जमानत निरस्त करने का अधिकार होगा।
याची के अधिवक्ता संत शरण उपाध्याय और साधना उपाध्याय का कहना था कि याची वैध पासपोर्ट वीजा पर भारत पढ़ने आया था। 2008 से उसने कई कोर्स पूरे किए। वह 2011 से चाइनीज भाषा के अनुवादक के तौर पर चेन्नई में नौकरी कर रहा है। 2017 में पासपोर्ट वीजा खो गया, मगर इसकी प्राथमिकी नहीं दर्ज कराई। सह अभियुक्त सैयद इमरान नसीर ने पैन कार्ड और आधार कार्ड बनवाने में मदद की। आईडीबीआई बैंक में स्टीवन जेना के नाम से खाता खुलवाया। फर्जी दस्तावेज बनवाए और भारत से नेपाल बार्डर पार करने में मदद की। जब वह नेपाल से भारत में सोनौली महाराजगंज में नौ जुलाई 18 को घुसा तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। याची को 20 अक्तूबर 2008 को पासपोर्ट बीजा मिला था जो 19 अक्तूबर 18 तक वैध था। इसके बाद नहीं बढ़ाया जा सका।