बाल साहित्य से बच्चों में साहित्य के प्रति प्रेम पैदा किया जा सकता है। साहित्य हमारी संस्कृति और इतिहास की जड़ है। उक्त बातें दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश ने जसरा साहित्य संवर्धन संस्थान व बच्चों की प्यारी बगिया की ओर से मां कोयल देवी स्मृति बाल साहित्य समारोह में बतौर मुख्य वक्ता कही।
उन्होंने कहा कि अगर हम बच्चों के अंदर साहित्य के प्रति रुचि पैदा कर लें तो वह मोबाइल कि गलत प्रयोग से काफी हद तक दूर हो जाएगा। इस दौरान उन्होंने पुरानी बाल साहित्य नंदन, चंपक बाल साहित्य तथा पंचतंत्र जैसी कथाओं का भी स्मरण किया। मुख्य अतिथि डॉ. दयाराम मौर्य रत्न ने साहित्यकारों से वर्तमान समय में अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। मौके पर लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि संत सत्यानंद त्यागी, डॉ. रामप्यारे प्रजापति, बालकेश्वर, शालिग्राम प्रजापति, विजय चितौरी, डॉ. आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, डॉ. अमरनाथ सिंह, लखन प्रतापगढ़ी, देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।