बताया कि आयोग की ओर से प्रक्रिया को सरल करने एवं निगरानी की अवधि तीन महीने किए जाने के सुझाव दिए गए हैं। पांच वर्ष से कम आयु में ही बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, इसके लिए भी प्रयास तेज किए जाएंगे। ताकि, बच्चे को आभास न होने पाए कि उसे गोद लिया जा रहा है।
सदस्य ने संबंधित विभाग के अफसरों संग बैठक कर योजनाओं की समीक्षा की तथा जरूरी निर्देश दिए। इससे पहले उन्होंने सदर बाजार आंगनबाड़ी केंद्र, सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय के एनआरसी एवं पीकू वार्ड, राजकीय बालगृह-बालिका एवं वन स्टाप सेंटर का निरीक्षण किया तथा जरूरी निर्देश दिए।
आंगनबाड़ी केंद्र में एक गर्भवती महिला की गोद भराई भी की। इस दौरान जिला प्रोबेधन अधिकारी पंकज मिश्र, प्रभारी जिल कार्यक्रम अधिकारी विमल चौबे, संजिता सिंह, ज्योत्सना त्रिपाठी, बाल विकास परियोजना अधिकारी ओम प्रकाश याद आदि मौजूद रहे।
कौशल विकास-रोजगार के लिए मांगे सुझाव
कौशल विकास मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं रोजगार की योजनाएं तैयार करने में अब आम लोगों की भी मदद ली जाएगी। इसके लिए मिशन के जिला समन्वयक राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य एसके श्रीवास्तव की ओर सुझाव मांगे गए हैं। मिशन कार्यालय की ओर एक प्रस्ताव एवं प्रारूप भी तैयार किया गया है। इसी के अनुरूप सुझाव मांगे गए हैं।