शनिवार को चातुर्मास व्रत आरंभ हो गया। संन्यासियों और महंतों ने चार महीने का व्रत धारण किया। अलोपीबाग स्थित आदि शंकराचार्य मंदिर ब्रह्म निवास में रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य जगद्गुरु वासुदेवानंद...
शनिवार को चातुर्मास व्रत आरंभ हो गया। संन्यासियों और महंतों ने चार महीने का व्रत धारण किया। अलोपीबाग स्थित आदि शंकराचार्य मंदिर ब्रह्म निवास में रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने चातुर्मास व्रत के पहले दिन इस व्रत की महिमा पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि चातुर्मास व्रत सनातन धर्म -संस्कृति का संवाहक है। त्रेता और द्वापर युग में भी चातुर्मास व्रत का उल्लेख धर्मग्रंथों में मिलता है।
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चातुर्मास अनुष्ठान की पूजा के बाद शिष्यों व भक्तों को दिए संदेश में स्वामी वासुदेवानंद ने गुरु -शिष्य परंपरा पर भी विस्तार से चर्चा की। बताया कि गुरु अपने शिष्य के माध्यम से संपूर्ण ज्ञान अगली पीढ़ी को सौंप देता है। इस मौके पर डॉ शिर्वाचन उपाध्याय, ब्रह्मचारी आत्मानंद, आचार्य छोटे लाल, पं विपिन मिश्र, मनीष मिश्रा, अभिषेक मिश्रा उपस्थित थे।