प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रोत्साहन पर इलाहाबाद में ई-रिक्शा खरीदने वाले सैकड़ों लोगों को मुश्किल झेलनी पड़ रही है। बिना चेचिस नंबर वाले इन ई-रिक्शा को अवैध घोषित कर दिया गया, जिसके बाद आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ने धरपकड़ शुरू कर दी। बिना चेचिस वाले सैकड़ों ई-रिक्शा का पंजीकरण भी नहीं हो सकता है इसलिए वे अब बिना इस्तेमाल के कबाड़ ही रह गए हैं। ऐसे में किसी तरह धन जुटाकर ई-रिक्शा खरीदने वाले सैकड़ों लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन आरटीओ के अफसरों का कहना है कि नियमों के खिलाफ उन्हें राहत नहीं दी जा सकती है।
इलाहाबाद में पिछले तकरीबन साल भर से ई-रिक्शा का चलन बढ़ा है। अब तो अनुमान है कि एक हजार से ज्यादा ई-रिक्शा शहर में चल रहे हैं। ई-रिक्शा को खुद प्रधानमंत्री भी बढ़ावा दे रहे हैं। ऑटो की जगह इनका इस्तेमाल बढ़ने भी लगा है। मगर पिछले दिनों आरटीए की बैठक में कमिश्नर ने आदेश दिया कि बिना आरटीओ में पंजीकरण वाले ई-रिक्शा को सीज किया जाए तो ई-रिक्शा धारकों पर मुसीबत टूट पड़ी। दरअसल, जानकारी के अभाव में ज्यादातर लोगों ने ई-रिक्शा ऐसी फर्मों से खरीद लिए, जिनका आरटीओ में रजिस्ट्रेशन नहीं था। उन ई-रिक्शा में चेचिस नंबर भी नहीं है।
एआरटीओ (प्रशासन) एके सिंह ने बताया कि मोटर व्हेकिल्स एक्ट के तहत बिना चेचिस वाले किसी वाहन का पंजीकरण आरटीओ में हो भी नहीं सकता। यही वजह है कि पिछले साल भर में खरीदे गए बिना चेचिस वाले ई-रिक्शा बेकार हो गए हैं। आरटीओ और पुलिस के संयुक्त दस्ते चेकिंग अभियान के दौरान सौ से ज्यादा ऐसे ई-रिक्शा को सीज कर चुके हैं। बिना चेचिस नंबर वाले ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता इसलिए उन्हें सड़कों पर चलने नहीं दिया जाएगा। अब आरटीओ में रजिस्टर्ड डीलरों के जरिए ही चेचिस नंबर वाले ई-रिक्शा बेचे जा रहे हैं। अभियान के बाद अब तक 140 ई-रिक्शा और 36 डीलर पंजीकृत हो चुके हैं। अफसरों का कहना है कि बिना पंजीकरण वाले ई-रिक्शा के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। मगर एक लाख रुपये से ज्यादा रकम से ऐसे ई-रिक्शा खरीदने वाले लोग परेशान हैं क्योंकि अब ये ई-रिक्शा न बेचे जा सकते हैं और न चला सकते।