इसरो की वैज्ञानिक दिशी कटियार।
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मिशन मून को लेकर थी बेहद रोमांचित और आश्वान्वित
वह कमांड सेंटर में चंद्रयान की ट्रैकिंग टीम में शामिल रही। पिता ने बताया कि दिन भर फोन अलग रखवा लिया जाता है, इसलिए काम के समय बात संभव नहीं हो पाती। लैंडिंग के दो दिन पहले तक बात हुई थी, तब वह मिशन मून को लेकर बेहद रोमांचित और आशान्वित थी। पिता इंद्रजीत ने बताया कि दिशी को बचपन से ही विज्ञान की किताबें पढ़ने और नई चीजेें खोजने का शौक रहा है।
तीसरी से छठवीं कक्षा तक दिशी ने जीएचएस से पढ़ाई की। इसके बाद 12वीं तक की शिक्षा डीपीएस स्कूल नैनी से हुई। एनआईटी दुर्गापुर से उसने वर्ष 2019 में बीटेक किया। वह बताते हैं कि चंद्रयान की सफल लैंडिंग होने तक वह अपनी पत्नी के साथ नियमित भगवान से दुआएं करते रहे, ताकि बेटी के सपने साकार हो सकें। अंतत: वह दिन आ ही गया। दिशी कटियार मिशन आदित्य एल-वन को ट्रैक करने वाली टीम में भी शामिल हैं।