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हाईकोर्ट : विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम एक्ट की वैधता को चुनौती

Mon, 13 Feb 2023 11:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम 2022 की वैधता की चुनौती याचिका पर केंद्र व राज्य सरकार सहित विद्युत नियामक आयोग से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
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कोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम 2022 की वैधता की चुनौती याचिका पर केंद्र व राज्य सरकार सहित विद्युत नियामक आयोग से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति एम के गुप्ता तथा न्यायमूर्ति एस के एच रिजवी की खंडपीठ ने नैनी प्रयागराज के व्यवसायी दिनेश शुक्ल की याचिका पर दिया है।

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याची का कहना है कि उसने अक्टूबर 2019 में प्री पेड विद्युत कनेक्शन लिया। छह माह बाद रिचार्ज नहीं किया। अक्तूबर 2022 में रिचार्ज कराया तो यह कहते हुए कनेक्शन एक्टीवेट नहीं किया गया कि कनेक्शन रिचार्ज न कराने की अवधि का न्यूनतम चार्ज नहीं जमा किया गया है। याची अधिवक्ता का तर्क है कि ऐसा करना टैरिफ आदेश का उल्लघंन है। याची ने विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत की। फोरम ने नोटिस जारी की किंतु दिसंबर 22 तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। जिस पर यह याचिका दायर की गई है।

याची अधिवक्ता का कहना है कि इस दौरान रेग्यूलेशन 2007 को समाप्त कर 2022 में नया रेग्यूलेशन लाया गया है। जिसमें फोरम के चेयरमैन पद पर अपर जिला जज रैंक के न्यायिक अधिकारी के स्थान पर अधिशासी अभियंता को चेयरमैन नियुक्त करने का उपबंध किया गया है। ऐसा करना कोई भी अपने केस का जज नहीं हो सकता के विधिक सिद्धांत का उल्लघंन करना है। यह अनुच्छेद 13 के विपरीत होने के कारण रद्द किया जाए।

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