साथ ही चतुर्थ श्रेणी दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की विचाराधीन याचिका के साथ सुनवाई हेतु पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पिछले 10 या 20 साल से कार्यरत दैनिक कर्मियों के अधिकार प्रभावित होते हैं तो भर्ती याचिका के निर्णय की विषयवस्तु होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वन विभाग में तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती को चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही चतुर्थ श्रेणी दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की विचाराधीन याचिका के साथ सुनवाई हेतु पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पिछले 10 या 20 साल से कार्यरत दैनिक कर्मियों के अधिकार प्रभावित होते हैं तो भर्ती याचिका के निर्णय की विषयवस्तु होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने पुष्पेंद्र सिंह व चार अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची का कहना था कि पहले विभाग में जो चतुर्थ श्रेणी पद थे, उन्हें पदस्थापित कर तृतीय श्रेणी पद की भर्ती की जा रही है। यदि चयन की अनुमति दी गई तो नियमित होने के हकदार दैनिक कर्मियों का हित प्रभावित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 20 साल से वन विभाग में कार्यरत दैनिक कर्मियों को समायोजित व नियमित करने का आदेश दिया है।
राज्य सरकार ने भी 20 साल से कार्यरत दैनिक कर्मियों को न्यूनतम वेतन भुगतान करने का आश्वासन दिया है। कोर्ट ने नीति तैयार करने की कुछ गाइडलाइंस निर्धारित किया है। इसलिए भर्ती पर रोक लगाई जाय। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।