Prayagraj News : अलोपशंकरी शक्तिपीठ।
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लोक मानस में पूजी जाने वाली देवियों पर रचे गीत अनुकरणीय
चाहे कुल देवी हों या ग्राम देवी या फिर नगर देवी। लोक मानस में रची-बसी ऐसी देवियों पर लोक कलाकार उदय चंद्र परदेसी की रचित लोक गीतों की पुस्तक का रविवार को हिंदुस्तानी एकेडेमी में किया गया। बतौर मुख्य अतिथि सांसद केशरी देवी पटेल ने इस पुस्तक को आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण से जहां संस्कार धूमिल होते जा रहे है, वहीं गांव से लेकर शहर तक में पूजा जाने वाली देवियों से परिचित होने के साथ ही उनकी महिमा से जुड़ने का लोगों को अवसर मिल सकेगा।
लोक गायक उदय चंद्र परदेसी ने इस पुस्तक में कुल देवी, ग्राम देवी, नगर देवी, राज्य देवी के अलावा अलग-अलग राज्यों असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, बिहार, मध्यप्रदेश के लोक मानस में रची-बसी देवियों की महिमा का गीतों के जरिए गुणगान किया है। इसमें कुल 111 लोकगीत हैं। इस मौके पर परदेसी ने जल्द आने वाली अपनी दूसरी पुस्तक का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों पर आधारित पारंपरिक लोक गीतों की उनकी दूसरी किताब बी जल्द ही आने वाली है। इसमें संस्कारों के अलावा व्रत, पर्व, त्योहार, श्रम लोक गीत, मौसम संबंधी लोक गीत शामिल हैं।
इस मौके पर भोजपुरी संगम पत्रिका के अजीत सिंह, सरस्वती पत्रिका के संपादक रविनंदन सिंह, गीतकार यश मालवीय, आकाशवाणी इलाहाबाद के केंद्र निदेशक लोकेश शुक्ला, शिव मंगल मानव ने भी इस पुस्तक को सराहा। संचालन वंदना शुक्ला ने किया। इस दौरान राजेश कुमार गुप्ता, अंशुला सिंह, प्रतिमा मिश्रा, कमला देवी, धर्मेंद्र कुमार ने लोकगीतों की प्रस्तुतियों से मन मोह लिया। ढोलक पर राजेंद्र प्रसाद, पैड पर सुनील मिश्रा, बैंजो पर धर्मेंद्र कुमार, हारमोनियम पर संतोष पांडेय ने संगत की।