मई-जून का महीना परीक्षाओं एवं रिजल्ट का चल रहा है। इस दौरान तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ देश के सभी बोर्ड अपने दसवीं एवं बारहवीं के रिजल्ट भी घोषित करते हैं। रिजल्ट के बाद छात्र-छात्राएं अवसाद में चले जाते हैं, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आत्महत्या जैसे घातक कदम भी उठा लेते हैं। अभी हाल में ही कोटा में इंजीनियरिंग एवं मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली। प्रतियोगी छात्रों एवं स्कूली छात्रों के इस घातक कदम के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) भी इसी महीने घोषित हो रहे दसवीं एवं बारहवीं के रिजल्ट के तनाव से छात्र-छात्राओं को बचाने के लिए आगे आया है। बोर्ड की ओर से स्कूली बच्चों को तनाव से बचाने के लिए काउंसलिंग एवं गाइडेंस प्रोग्राम चलाने को कहा गया है।
बोर्ड ने अपने से संबद्ध सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं संस्था प्रमुखों को भेजे पत्र में कहा है कि वह छात्रों को रिजल्ट के बाद आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गाइडेंस एवं काउंसलिंग कार्यक्रम चलाए। इस बारे में बोर्ड की ओर से स्कूलों के प्रधानाचार्यों से छात्रों की समस्याओं से जुड़ा एक प्रश्नावली तैयार करके सीबीएसई को हर हाल में 20 मई तक भेज दें। बोर्ड की ओर से स्कूलों को भेजे गए पत्र में काउंसलिंग एवं गाइडेंस प्रोग्राम बच्चों के लिए क्यों आवश्यक है, इसकी जानकारी दी गई है।
सीबीएसई की ओर से अपने संबद्ध स्कूलों में काउंसलर नियुक्त किया गया है। गंगागुरुकुलम की प्रधानाचार्या अल्पना डे ने बताया कि सीबीएसई की ओर से बच्चों को तनाव से बचाने के लिए भेजे गए पत्र को ध्यान में रखकर प्रश्नावली तैयार करके बोर्ड को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि सीबीएसई के पीआरओ रामा शर्मा ने यह पत्र स्कूलों को भेजा है। सीबीएसई की ओर से इस संबंध में सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भेजे पत्र में कहा गया है कि वह छात्रों के आसपास ऐसा वातावरण तैयार करें कि वह रिजल्ट को तनाव नहीं बल्कि एक नए अवसर के रूप में लें। मनोविज्ञानशाला उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. कमलेश तिवारी का कहना है कि सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड सहित अन्य परीक्षाओं में शामिल होने वाले बच्चों के लिए काउंसलिंग एवं गाइडेंस प्रोग्राम चलाया जाना चाहिए।