नोटबंदी के दौर में आम लोग भले ही कैश के लिए परेशान हों लेकिन चुनाव लड़ने वालों पर नोटबंदी का कोई जोर नजर नहीं आ रहा। प्रत्याशियों के पास कैश की कोई कमी नहीं। 2012 के चुनाव में जो प्रत्याशी मैदान में उतरे थे, उनमें से कई इस बार भी ताल ठोकी है। इनमें से ज्यादातर प्रत्याशियों ने पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार अपने शपथपत्र में कैश अधिक दिखाया है। किसी के पास दो लाख तो किसी के पास दस लाख रुपये से भी अधिक कैश है।
प्रतापपुर से पर्चा भरने वाले एक प्रत्याशी ने पिछली बार 15 हजार तो इस बार 20 हजार रुपये कैश अपने शपथपत्र में दिखाया है। बारा से एक प्रत्याशी के पास पिछले चुनाव में सात लाख 50 हजार रुपये कैश था, जो इस बार बढ़कर 13 लाख 78 हजार रुपये हो गया है। इनकी पत्नी के पास भी तकरीबन दो लाख रुपये कैश है। करछना से एक प्रत्याशी ने अपने शपथ पत्र में 48 हजार रुपये कैश दिया गया है जबकि पिछले चुनाव में उनके पास नगद के रूप में 9720 रुपये थे। इसी सीट से एक प्रत्याशी ने तकरीबन दो लाख 10 हजार रुपये कैश दिखाया है। पिछले चुनाव में इस प्रत्याशी के पास ढाई लाख रुपये थे। इसी बार सिर्फ 40 हजार रुपये कम हैं लेकिन इनकी संपत्ति बढ़कर दोगुनी हो गई है।
शहर पश्चिमी से एक प्रत्याशी ने पिछले चुनाव में एक लाख रुपये कैश दिखा गया था जबकि इस बार 25 हजार 400 रुपये दिखाया है। कैश तो कम हुआ लेकिन पांच साल में इनके पास अस्सी लाख रुपये मूल्य की संपत्ति बढ़ गई है। सोरांव से एक उम्मीदवार के पास पिछले चुनाव में 10 हजार रुपये कैश थे। इस बार उनके पास 50 हजार रुपये कैश है। फाफामऊ से एक प्रत्याशी के पास पिछले चुनाव में 20 हजार रुपये और इस बार 45 हजार रुपये नगद है। इसी तरह शहर दक्षिणी से पर्चा भरने वाले एक प्रत्याशी ने अपने पास 12 लाख और पत्नी के पास नौ लाख रुपये कैश दिखाया है। पिछले चुनाव में यह किसी दूसरी विधानसभा सीट से लड़े थे और उस वक्त इनके पास पांच लाख 12 हजार रुपये नगदी थी। कोरांव से एक प्रत्याशी ने 29 हजार 500 रुपये कैश दिखाया है जबकि पिछले चुनाव में उनके पास 25 हजार 650 रुपये नगद के रूप में थे।