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दुष्कर्म केस में गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने का मामला : मातहतों पर कार्रवाई, अफसरों की भूमिका की कब होगी जांच? 

Sun, 12 Dec 2021 03:48 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

कर्नलगंज में दर्ज दुष्कर्म केस के गवाह को हंडिया थाने में दर्ज मामले में फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में दो इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मी निलंबित किए गए थे।
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जेल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
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विस्तार
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गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में भले ही पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया हो, लेकिन अफसरों की भूमिका की जांच न होने को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि एक मामले में दो युवकों का नाम फर्जी तरीकेसे खोल दिया गया तो आखिर इसकी भनक अफसरों को कैसे नहीं लगी। मामले में एससीएसटी की धारा बढ़ाए जाने के बाद भी लंबे समय तक विवेचना ट्रांसफर न होने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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कर्नलगंज में दर्ज दुष्कर्म केस के गवाह को हंडिया थाने में दर्ज मामले में फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में दो इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मी निलंबित किए गए थे। जबकि इंस्पेक्टर समेत तीन के खिलाफ जालसाजी समेत अन्य आरोपों में मुकदमा भी दर्ज किया गया था जिसमें दो आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। बड़ी बात यह है कि इस मामले में न सिर्फ गवाह बल्कि एक अन्य निर्दोष को भी फंसाने की तैयारी थी और उसका नाम भी प्रकाश में लाया गया था।

अफसरों को क्यों नहीं लगी मामले की भनक
मामले में कार्रवाई भले ही हुई हो, लेकिन इसे लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि आननफानन में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कर दी गई लेकिन संबंधित अफसरों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई। आखिर दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में फर्जीवाड़ा कर निर्दोषों को जेल भेजने की साजिश की भनक अफसरों को कैसे नहीं लगी।

यह भी सवाल है कि विवेचना के दौरान एससी-एसटी की धारा बढ़ाए जाने के बाद भी विवेचना इंस्पेक्टर के पास से ट्रांसफर क्यों नहीं की गई। फिलहाल इन सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं और इसे लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं भी हैं। मामले में एसपी गंगापार से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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फरार इंस्पेक्टर, दीवान समेत तीन वांछितों का सुराग नहीं
उधर जार्जटाउन में दर्ज मामले में वांछित हंडिया के पूर्व इंस्पेक्टर बृजेश सिंह व दीवान पन्ना लाल यादव का अब तक सुराग नहीं मिल सका है। साथ ही मामले में आरोपी बनाए गए अज्ञात सहयोगियों को भी अब तक चिह्नित नहीं किया जा सका है। गौरतलब है कि इस मामले में हंडिया के पूर्व इंस्पेक्टर, एसआई बलवंत यादव व असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव को नामजद कराया गया था। मदन व एक अन्य जेल भेजे जा चुके हैं जबकि विवेचना के दौरान प्रकाश में लाए गए पन्नालाल यादव, पूर्व इंस्पेक्टर समेत तीन की तलाश जारी है।
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